नवभारत ब्यूरो
गुवाहाटी. मणिपुर में लंबे समय से जारी नागा-कुकी तनाव के बीच गुवाहाटी में शनिवार को केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और नागा नागरिक संगठनों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के बाद यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने 131 दिनों से जारी आर्थिक नाकाबंदी को फिलहाल कुछ समय के लिए हटाने का फैसला किया है। इससे मणिपुर के नागा बहुल इलाकों से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवश्यक वस्तुओं और वाहनों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह नाकाबंदी स्थायी रूप से समाप्त करने के बजाय अस्थायी रूप से हटाई गई है। नागा संगठनों की प्रमुख मांगों पर आगे की कार्रवाई और सरकार की ओर से ठोस कदम इस फैसले की अगली दिशा तय करेंगे।
गुवाहाटी में किन मुद्दों पर हुई बातचीत?
बैठक 26 सितंबर को गुवाहाटी के गड़भंगा स्थित बीएसएफ फ्रंटियर मुख्यालय के ऑफिसर्स मेस में आयोजित की गई। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, मणिपुर के गृह विभाग और नागा नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का घोषित एजेंडा मणिपुर की मौजूदा कानून-व्यवस्था और शांति-निर्माण के उपाय थे।
यूएनसी के नेतृत्व में 10 से अधिक नागा प्रतिनिधि बैठक में पहुंचे। इनमें ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर (एएनएसएएम), नागा वूमेन्स यूनियन, लियांगमै नागा काउंसिल, रोंगमेई नागा काउंसिल, ज्वाइंट ट्राइब काउंसिल-मणिपुर और नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन सहित कई संगठन शामिल थे।
यूएनसी की चार प्रमुख मांगें :
बैठक से पहले यूएनसी चार प्रमुख मांगों पर जोर दे रही थी। इनमें कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते को समाप्त करना, छह लियांगमैई नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाना, केएनएफ-पी को आतंकवादी संगठन घोषित करना तथा मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाना शामिल था। ये नागा संगठनों की मांगें हैं और इनमें से किसी आरोप को सरकार की ओर से अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।