सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाने पर ‘राष्ट्र विरोधी’ कहलाना सम्मान की बात: कन्हैया कुमार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 08 Apr 2024 07:42 PM
सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाने पर ‘राष्ट्र विरोधी’ कहलाना सम्मान की बात: कन्हैया कुमार
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नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा है कि मोदी सरकार ‘राष्ट्र विरोधी’ का स्टिकर लेकर घूम रही है और जो भी उसके खिलाफ तथा उसके मन की बात नहीं करता, उसके ऊपर यह चिपका दिया जाता है. कुमार ने ‘पीटीआई’ मुख्यालय में समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाने पर ‘राष्ट्र विरोधी’ कहलाना सम्मान की बात है. उन्होंने कहा कि आज इस दौर में अगर किसी को राष्ट्र विरोधी नहीं कहा जा रहा है, तो वह यह मानकर चले कि राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा नहीं कर रहा है.

कुमार ने कहा कि ‘आजादी’ का नारा आज भी प्रासंगिक है और कल भी रहेगा तथा जब गुलामी की बात होगी, तो आजादी की बात की जाएगी. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष ने जेएनयू से जुड़े उनके जैसे नेताओं को एक तबके द्वारा ‘राष्ट्र विरोधी’ कहे जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”यह सम्मान की बात है. यह बुरा लगने वाली बात नहीं है. अगर आप कुछ काम कर रहे हैं, जिसको लेकर आप दृढ़ संकल्पित हैं कि यह सही है, तो उस काम से जिनको फर्क पड़ता है, वो बुरा-भला कहेंगे ही. अगर मुझे कोई अपना दुश्मन समझता है, तो मेरी प्रशंसा तो नहीं करेगा, मेरे बारे में बुरा ही कहेगा.”

उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि कोई आपको तकलीफ पहुंचाना चाहता है, तो उसकी पहली शर्त यह है कि आप तकलीफ महसूस नहीं करें.” कुमार ने दावा किया, ”आज की तारीख में सरकार से जो भी सवाल करे, चाहे वो राजनीतिक व्यक्ति हो या न हो, किसी पेशे से जुड़ा हो, उसको यह ‘बैज ऑफ ऑनर’ दिया जा रहा है. कुछ दिनों पहले यह किसानों को दिया जा रहा था, इससे पहले पत्रकारों को दिया जा रहा था. यह सरकार समय-समय पर ‘बैज ऑफ ऑनर’ देती रहती है.”

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ”मुझे लगता है कि यह इमोजी का दौर है. लोग पहले ‘इंट्रोवर्ट’ होते थे, ‘एक्स्ट्रोवर्ट’ होते थे, आजकल लोग ‘टेक्स्टोवर्ट’ हो रहे हैं. आजकल आसानी से कोई भी इमोजी चिपका दी जाती है. यह सरकार स्टिकर लेकर घूम रही है. आप ज्यों ही उनके खिलाफ बात करेंगे, उनके मन की बात नहीं करेंगे, देश के जन की बात करेंगे, तो बहुत आसानी से यह स्टिकर चिपका दिया जाता है.” जेएनयू परिसर में कथित देश विरोधी नारेबाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद रिहाई के उपरांत कुमार द्वारा दिए गए भाषण बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह उनके जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है.

उन्होंने कहा, ”मैं हमेशा मानता हूं कि वह मेरी जिंदगी का महत्वपूर्ण कालखंड था. यह मेरी एक यात्रा है. जो परिस्थिति रही, उसके हिसाब से मैं जिंदगी में यहां हूं. मैं चाहता हूं कि वो लाइन (आजादी का नारा) दिमाग में हमेशा रहे और उसे याद करते रहें, ताकि समाज में योगदान दे सकें.” इस सवाल पर कि क्या ‘आजादी’ का नारा आज भी प्रासंगिक है, तो कुमार ने कहा, ”आजादी का नारा आज भी प्रासंगिक है. आंदोलनों में आज भी मैं इस नारे को लगाता हूं. जब समाज में अंधेरा बढ़ रहा है, तो रोशनी की बात करनी चाहिए. अंग्रेजों के समय में हम ‘सब्जेक्ट (प्रजा)’ थे, फिर हम नागरिक बने. अब व्यवस्था हमें नंबर में समेटना चाहती है. नंबर में सबकुछ बात हो रही है.”

उनका कहना था, ” हम देख रहे हैं कि समता की जो भा.वना थी, उसे खत्म करने की बात की जा रही है. जब गुलामी की बात हो रही है, तो आजादी को जोर से बोलने की जरूरत है. जब हम आजादी की बात करते हैं, तो देश में और देश के अंदर की समस्याओं से आजादी की बात करते हैं.” कुमार ने कहा कि यह नारा आज भी प्रासंगिक है और कल भी रहेगा. वामपंथी राजनीति से कांग्रेस के नेता बने कुमार से जब यह पूछा गया कि क्या कभी वह दक्षिणपंथ का भी रुख कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि वह कभी ‘अति वामपंथी’ नहीं रहे और अतिवाद की तरफ कभी नहीं जा सकते, क्योंकि उनकी लड़ाई ही इसके खिलाफ है.

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