फसल बीमा योजना से कंपनियों ने 40 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 28 May 2024 09:14 PM
फसल बीमा योजना से कंपनियों ने 40 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बीमा कंपनियों ने 40,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है, जबकि किसान बीमा की राशि का भुगतान नहीं होने की समस्या से जूझ रहे हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि सत्ता में आने पर कांग्रेस बीमा राशि के लिए दावा करने के 30 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करेगी.

रमेश ने एक वीडियो जारी कर कहा, ”वर्ष 2016 में निवर्तमान प्रधानमंत्री ने फसल बीमा योजना लागू की. इसका क्या नतीजा निकला?बीमा कंपनियों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से 40,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है. वहीं किसान बीमा राशि का भुगतान नहीं होने की समस्या से जूझ रहे हैं.” उन्होंने पार्टी की गारंटी का उल्लेख करते हुए कहा, ”कांग्रेस की ‘किसान न्याय’ गारंटी में यह भी शामिल है कि दावा करने के 30 दिनों के भीतर बीमा राशि का सीधे खाते में भुगतान सुनिश्चित करना है. साथ-साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पूरी तरह से बदलाव करके इसे किसानों के हित में बनाना है.”

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पश्चिम बंगाल में जनसभा का उल्लेख करते हुए उनसे राज्य से संबंधित कुछ विषयों पर सवाल किए. उन्होंने सवाल किया, ”क्या प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के लोगों के जीवन को महत्व देते हैं? निवर्तमान प्रधानमंत्री हमेशा पश्चिम बंगाल को बदनाम क्यों करते रहते हैं? पश्चिम बंगाल के लिए मनरेगा का पैसा लगभग तीन सालों से क्यों रोक दिया गया है?”

प्रधानमंत्री बताएं, ‘सरना’ कोड लागू करने की मांग पर उनका क्या रुख है : कांग्रेस

कांग्रेस ने झारखंड में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा की पृष्ठभूमि में मंगलवार को राज्य के आदिवासी समुदाय की ‘सरना’ धर्म कोड को मान्यता देने से जुड़ी मांग का मुद्दा उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि आदिवासियों की इस मांग पर उनका क्या रुख है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के एक बयान को लेकर उन पर प्रहार किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर “चोरों और डकैतों” को भी भाजपा से टिकट मिलता है तो उनका समर्थन किया जाना चाहिए.
रमेश ने सवाल किया, “गोड्डा से भाजपा प्रत्याशी लोगों से भाजपा से टिकट पाने वाले “चोरों और डकैतों” को वोट देने की अपील क्यों कर रहे हैं?” सरना कोड से जुड़ा विषय उठाते हुए उन्होंने कहा, “वर्षों से सरना को मानने वाले झारखंड के आदिवासी समुदाय भारत में अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता दिए जाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन जनगणना के लिए धर्म के कॉलम से “अन्य” विकल्प को हटाने का हालिया निर्णय सरना अनुयायियों के लिए दुविधा पैदा करता है. या तो उन्हें अब कॉलम को खाली छोड़ना होगा या उसमें दिए गए धर्मों में से किसी एक के साथ ख.ुद को जोड़कर बताना होगा. ” उनके मुताबिक, नवंबर 2020 में, झारखंड विधानसभा ने इस मांग का समर्थन करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था.

रमेश ने दावा किया, “भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास के 2021 तक सरना कोड लागू करने के आश्वासन और गृह मंत्री अमित शाह के 2019 में भी यही वादा करने के बावजूद, मोदी सरकार द्वारा कोई प्रगति नहीं की गई है. ” उन्होंने कहा, “आज जब प्रधानमंत्री मोदी झारखंड के दौरे पर होंगे तो क्या वह इस मुद्दे का समाधान पेश करेंगे और स्पष्ट करेंगे कि सरना कोड लागू करने पर उनका क्या रुख है? ”

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