उद्धव ठाकरे विश्वासघात के शिकार, मोदी मेरे शत्रु नहीं : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

मुंबई. उत्तराखंड स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को कहा कि शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे विश्वासघात के शिकार हैं. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस साल जनवरी में अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से इनकार कर दिया था.

उद्योगपति मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी का राधिका मर्चेंट से विवाह होने के बाद शनिवार को मुंबई में नवदंपति को आशीर्वाद देने के लिए आयोजित ‘शुभ आशीर्वाद’ समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंकराचार्य से आशीर्वाद लिया था. इस पर उन्होंने कहा कि वह मोदी के शुभचिंतक हैं.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ”हां, प्रधानमंत्री मोदी मेरे पास आए और प्रणाम किया. हमारा नियम है कि जो भी हमारे पास आएगा, हम उसे आशीर्वाद देंगे. नरेन्द्र मोदी जी हमारे शत्रु नहीं हैं. हम उनके शुभचिंतक हैं और हमेशा उनके भले की बात करते हैं. अगर वह कोई गलती करते हैं, तो हम उन्हें वह भी बताते हैं. वह हमारे शत्रु नहीं हैं.”

ठाकरे से मुंबई के बांद्रा स्थित उनके आवास ‘मातोश्री’ में मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ”उद्धव ठाकरे के साथ विश्वासघात हुआ है और कई लोग इससे आक्रोशित हैं. मैं उनके आग्रह पर उनसे मिला और कहा कि जनता को हुई पीड़ा उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने तक कम नहीं होगी.” उन्होंने कहा, ”उन्होंने (ठाकरे ने) कहा कि वह हमारे आशीर्वाद के साथ जो भी जरूरत होगी, करेंगे.” उन्होंने कहा कि विश्वासघात सबसे बड़ा पाप है.

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने कहा, ”जो विश्वासघात करता है वह हिंदू नहीं हो सकता है. जो विश्वासघात सहता है, वह हिंदू है.” उन्होंने कहा, ”महाराष्ट्र की पूरी जनता विश्वासघात से आक्रोशित है और यह हाल के (लोकसभा) चुनाव में प्रतिबिंबित भी हुआ.” उन्होंने कहा, ”हमारा राजनीति से कोई लेना देना नहीं है लेकिन हम विश्वासघात के बारे में बात कर रहे हैं जो धर्म के अनुसार पाप है.” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 10 जुलाई को दिल्ली में केदारनाथ मंदिर की आधारशिला रखने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा, ”जब केदारनाथ का पता हिमालय है तो कैसे यह दिल्ली में हो सकता है? आप लोगों को क्यों भ्रमित कर रहे हैं.” शंकराचार्य ने मातोश्री में आयोजित एक पूजा समारोह में भी हिस्सा लिया.

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