प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी जमीनी हकीकत राहुल और अखिलेश के लिए मुश्किलें बढ़ा देगी: शिक्षा मंत्री प्रधान

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 22 Jul 2024 08:33 PM
प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी जमीनी हकीकत राहुल और अखिलेश के लिए मुश्किलें बढ़ा देगी: शिक्षा मंत्री प्रधान
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नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी और उनका गुट ‘घड़ियाली आंसू बहा रहे’ हैं, और पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान के प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी जमीनी हकीकत दोनों की मुश्किलें बढ़ा देगी. लोकसभा में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) विवाद को लेकर सोमवार को विपक्ष के निशाने पर रहने के बाद शिक्षा मंत्री ने यह बयान दिया.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर सरकार पर विपक्ष के हमले का नेतृत्व करते हुए कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली में एक बहुत गंभीर समस्या है और प्रधान ने इसके लिए खुद को छोड़कर सभी को दोषी ठहराया है. इस पर पलटवार करते हुए प्रधान ने सवाल किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार जब सत्ता में थी, तो वह अनुचित आचरण निषेध विधेयक, 2010 सहित शैक्षणिक संस्थानों में कदाचार रोकने वाले विधेयकों को लागू करने में क्यों ‘विफल’ रही.

प्रधान ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ”नेता प्रतिपक्ष और उनका गुट घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. पूर्ववर्ती संप्रग सरकार और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान प्रश्नपत्र लीक की जमीनी हकीकत राहुल गांधी और अखिलेश यादव, दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा देगी.

उन्होंने कहा कि शायद राहुल गांधी अनुचित व्यवहार की बुनियादी बातों और गणित को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं और इससे पता चलता है कि कांग्रेस सरकार अनुचित आचरण निषेध विधेयक-2010 सहित शैक्षणिक संस्थानों में कदाचार को रोकने के विधेयकों को लागू करने में क्यों विफल रही. उन्होंने कहा कि क्या नेता प्रतिपक्ष बता सकते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने किस मजबूरी, दबाव और किन कारणों से अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए कानून लाने से इनकार कर दिया? मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले सात वर्षों में प्रश्नपत्र लीक का कोई साक्ष्य नहीं मिला है.

सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं, उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार हो रही है नीट परीक्षा: प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ से जुड़े मामले पर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए विपक्ष के आरोपों के संदर्भ में यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि पिछले सात वर्षों में 70 पेपर लीक हुए हैं.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस बार राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 4,700 केंद्रों पर हुई थी, लेकिन सिर्फ एक जगह बिहार में गड़बड़ी का मामला सामने आया. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने पूरक प्रश्न पूछते हुए दावा किया कि पिछले सात वर्षों में 70 पेपर लीक हुए हैं. इस पर प्रधान ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है.

उनका कहना था, ”पेपर लीक का मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष है. प्रधान न्यायाधीश इसकी खुद सुनवाई कर रहे हैं.” शिक्षा मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अस्तित्व में आने के बाद से 240 परीक्षाएं हुई हैं जिनमें पांच करोड़ छात्रों ने आवेदन किया और साढ.े चार करोड़ ने परीक्षाओं में भाग लिया. उन्होंने कहा, ”हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. सब कुछ सार्वजनिक पटल पर उपलब्ध है.” द्रमुक सांसद कलानिधि वीरास्वामी ने नीट परीक्षा को निरस्त करने की मांग उठाई.

इसके जवाब में प्रधान ने द्रमुक पर कटाक्ष करते हुए कहा, ”2010 में पहली बार नीट का फैसला किया गया था. सबको पता था कि उस समय सरकार में कौन था और कौन समर्थन कर रहा था.” शिक्षा मंत्री का कहना था, ”उच्चतम न्यायालय ने अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा कराने का दो बार निर्देश दिया था. इसी के अनुसार यह परीक्षा जारी है.” प्रधान ने कहा कि 2010 में जो लोग फैसले करने में शामिल थे, अब वही सवाल खड़े कर रहे हैं.

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