अप्रभावी हो चुके मुसलमान वक्फ अधिनियम के निरसन के लिए लोकसभा में विधेयक पेश

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 08 Aug 2024 07:22 PM
अप्रभावी हो चुके मुसलमान वक्फ अधिनियम के निरसन के लिए लोकसभा में विधेयक पेश
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नयी दिल्ली. आधुनिक भारत में वक्फ संपत्ति के प्रभावी प्रबंधन के लिए, अप्रचलित और अप्रभावी हो चुके मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को समाप्त करने वाला एक विधेयक बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश किया गया. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्ष के शोर-शराबे के बीच मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 सदन में पेश किया.

रीजीजू ने इस विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों का हवाला देते हुए कहा कि वक्फ अधिनियम, 1995 के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के समरूप, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए उक्त अधिनियम को निरसित करने का प्रस्ताव है. उन्होंने कहा कि इसे निरस्त किये जाने से अनावश्यक अधिनियम के सतत अस्तित्व के परिणामस्वरूप हुई विसंगतियां और अस्पष्टता समाप्त होंगी.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कानून को बहुत पहले ही निरस्त कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक यह संभव नहीं हो सका था.
इस बीच विपक्ष के सदस्यों ने मुसलमान वक्फ संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे जाने की सिफारिश के परिप्रेक्ष्य में इस विधेयक को पेश किये जाने पर सवाल खड़ा किया.

इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने संसदीय कार्यवाही से संबंधित नियम 67 का हवाला देते हुए कहा कि इस नियम के तहत दो समरूप विधेयकों में से एक को वापस लिया जा सकता है. इसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने रीजीजू को विधेयक पुर:स्थापित करने को कहा. केंद्रीय मंत्री ने विधेयक पुर:स्थापित करने की अनुमति मांगी और इसे सदन ने ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया.

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