बेंगलुरु. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बी वाई विजयेंद्र ने मंगलवार को कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती बी एम का 14 भूखंडों का स्वामित्व और कब्जा छोड़ने का फैसला मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) घोटाले में गलत काम करने को आधिकारिक रूप से स्वीकार करने के समान है और इस मामले में मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए.
विजयेंद्र ने पार्वती के कदम को एक ”राजनीतिक नाटक” करार दिया और आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य ”कानूनी अड़चनों से बचना” है. उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को लोकायुक्त की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए सिद्धरमैया, उनकी पत्नी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एमयूडीए प्रकरण के संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था. संघीय एजेंसी ने मुख्यमंत्री और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है. ईसीआईआर पुलिस की प्राथमिकी के समान होती है. ईसीआईआर दर्ज किए जाने के कुछ घंटों बाद पार्वती ने एमयूडीए के आयुक्त को पत्र लिखकर मैसूरु के 14 भूखंडों को वापस करने की पेशकश की.
विजयेंद्र ने कहा, ”मुझे लगता है कि जो मुख्यमंत्री सिद्धरमैया राज्य की जनता के सामने यह दावा करते थे कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, जो राज्यपाल पर दिल्ली (केंद्र सरकार) के हाथों की कठपुतली बनकर काम करने का आरोप लगाते थे, आज अगर उन्हीं सिद्धरमैया ने भूखंड वापस करने का फैसला किया है तो यह फैसला सिर्फ कानूनी अड़चनों से बचने, राजनीतिक सहानुभूति हासिल करने और अपनी पार्टी के उन लोगों के खिलाफ है जो उन्हें चुनौती देने के लिए तैयार बैठे हैं.” विजयेंद्र ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सिद्धरमैया ने भूखंड वापस करने पर सहमति जताकर गलत काम करने की बात ”आधिकारिक तौर पर स्वीकार” कर ली है और यह एक ”राजनीतिक नाटक” है.
उन्होंने कहा, ”हम मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से आग्रह करते हैं कि वह अड़ियल रवैया न अपनाएं और अपने पद से इस्तीफा दे दें.” विजयेंद्र ने कहा कि जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री के खिलाफ निजी शिकायतों के आधार पर जांच को मंजूरी दी थी, तब कांग्रेस अध्यक्ष, मंत्रियों और नेताओं ने आरोप लगाया था कि उनका निर्णय राजनीति से प्रेरित है और वह केंद्र सरकार के हाथों की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले सिद्धरमैया को राज्यपाल से माफी मांगनी चाहिए.
उन्होंने गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा को तत्काल पर्याप्त पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया जिनकी शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने सिद्धरमैया, उनकी पत्नी और दो अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की था. उन्होंने दावा किया कि कृष्णा के खिलाफ ”षड्यंत्र” की खबरें हैं.
विजयेंद्र ने कहा, ”मैसुरु के स्नेहमयी कृष्णा ने जब सिद्धरमैया पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था तो उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी गई, जिसका उद्देश्य उनके हाथ बांधना था. मुख्यमंत्री के इशारे पर उनके समर्थकों ने उन्हें धमकाने की कोशिश की.” कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा सिद्धरमैया के इस्तीफे की मांग किए जाने के संबंध में मंत्री एच सी महादेवप्पा के हालिया बयान और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा कथित तौर पर कुछ संकेत दिए जाने का जिक्र करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और गृह मंत्री जी परमेश्वर ने सोमवार को सिद्धरमैया के तत्काल इस्तीफे की आवश्यकता पर चर्चा की, क्योंकि अब उनका बचाव करना संभव नहीं है और पार्टी को र्शिमंदगी उठानी पड़ रही है.
उन्होंने कहा कि भाजपा से अधिक कांग्रेस के नेताओं को इस बात का भरोसा है कि मुख्यमंत्री इस्तीफा दे देंगे. विजयेंद्र ने कहा, ”कांग्रेस के अंदर यह चर्चा है कि उनका अधिक समय तक पद पर बने रहना संभव नहीं है और उन्हें इस्तीफा देना ही होगा. मेरे हिसाब से यह बस कुछ घंटों की बात है. उन्हें किसी भी समय इस्तीफा देना पड़ सकता है.” उन्होंने कहा कि बेंगलुरू से मैसुरु तक के ‘मैसुरु चलो’ मार्च के माध्यम से भाजपा की लड़ाई और हाल में विधानसभा के अंदर दिन-रात विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री ने आरोपों को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा, ”इसलिए मुख्यमंत्री को समय बर्बाद किए बिना तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.”
भूखंड लौटाने का फैसला अपराध की स्वीकारोक्ति है : भाजपा सांसद सिरोया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनकी पत्नी पार्वती बी एम पर मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूमि आवंटन मामले में ”हर किसी को धोखा देने” का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद लहर सिंह सिरोया ने मंगलवार को दावा किया कि 14 भूखंडों को वापस करने का फैसला अपराध की स्वीकारोक्ति है.
राज्यसभा सदस्य ने कहा, ”इन भूखंडों को लौटाकर उन्होंने कोई परोपकार नहीं किया है. उन्हें फिर भी कानून का सामना करना पड़ेगा. उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.” पार्वती ने एमयूडीए को सोमवार को पत्र लिखकर मैसूरु के 14 भूखंडों का स्वामित्व और कब्जा छोड़ने के अपने फैसले से अवगत कराया था.
सिरोया ने आरोप लगाया कि एमयूडीए के ये भूखंड जमीन के ऐसे टुकड़े के लिए अवैध मुआवजा थे जो मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने कहा, ”सबकुछ धोखाधड़ी है. इसलिए कुछ नहीं बदला, कानून जल्द ही सिद्धरमैया और उनके परिवार को पकड़ लेगा. भ्रष्टाचार के दूसरे आरोप भी अब उन पर लगेंगे.” भाजपा सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने हर किसी को धोखा दिया है. सिरोया ने कांग्रेस सरकार और सिद्धरमैया का बचाव करने वाले ‘छद्म बौद्धिक मित्रों’ पर भी निशाना साधा.
मेरी पत्नी नफरत की राजनीति का शिकार हुई हैं : सिद्धरमैया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती बी. एम. द्वारा उन्हें मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) से आवंटित 14 भूखंडों का स्वामित्व और कब्जा छोड़ने के फैसले के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्वती उनके खिलाफ ‘नफरत की राजनीति’ का शिकार हुई हैं और पत्नी के इस कदम से वह हैरान हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्वती अपने परिवार तक ही सीमित थीं लेकिन नफरत की राजनीति के कारण उन्होंने ”मानसिक यातना” झेली.
उन्होंने ऑनलाइन किए गए एक पोस्ट में कहा, ”मेरी पत्नी पार्वती ने मैसूर में एमयूडीए के भूमि अधिग्रहण किए बिना जब्त की गई जमीन के मुआवजे के रूप में मिली जमीनें वापस कर दी हैं.” सिद्धरमैया ने दावा किया कि राज्य के लोग यह भी जानते हैं कि विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ राजनीतिक नफरत पैदा करने के लिए झूठी शिकायत की और उनके परिवार को विवाद में घसीटा.
उन्होंने कहा, ”मेरा रुख इस अन्याय के आगे झुके बिना लड़ने का था, लेकिन मेरे खिलाफ चल रही राजनीतिक साजिश से परेशान मेरी पत्नी ने इस जमीन को वापस करने का फैसला किया है, जिससे मैं भी हैरान हूं.”
सिद्धरमैया ने कहा, ”मेरी पत्नी ने चार दशक के मेरे राजनीतिक जीवन में कभी हस्तक्षेप नहीं किया और अपने परिवार तक ही सीमित रहीं, लेकिन आज वह मेरे खिलाफ नफरत की राजनीति का शिकार हो गईं और मानसिक यातना झेल रही हैं. मैं दुखी हूं. हालांकि, मैं अपनी पत्नी के जमीन वापस करने के फैसले का सम्मान करता हूं.”