
नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि एक तकनीक आधारित समाज में युवा दिमाग को आकार देने में भविष्य के लिए तैयार शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारत विश्व अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख वृद्धि इंजन बनने के लिए तैयार है और इसलिए शिक्षकों की भूमिका और भी बढ़ जाती है.
प्रधान ने कहा कि भविष्य की तैयारी सबसे बड़ी चुनौती है और शिक्षकों तथा छात्रों, दोनों के कौशल को बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को रटने की जगह वैज्ञानिक-शिक्षण परिणामों के जरिये छात्रों के बीच जिज्ञासा, नयी सोच और आलोचनात्मक दृष्टि को बढ़ावा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षकों में प्रतिभा है, उन्हें बस सही दिशा और अवसर की जरूरत है.
भारती एयरटेल फाउंडेशन के ‘द टीचर ऐप’ का अनावरण करते हुए प्रधान ने कहा, ”वर्ष 2015 में मौजूद वैश्विक नौकरियों में लगभग 25 प्रतिशत अब नहीं हैं. वर्ष 2028 तक, लगभग 40 प्रतिशत मौजूदा नौकरियों की प्रकृति बदल जाएगी. समाज कौशल विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, और चूंकि भारत की आबादी सबसे युवा है, इसलिए शिक्षकों के पास इसकी कुंजी होगी.” मंत्री ने कहा कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत कुछ वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है.
प्रधान ने कहा, ”हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को देखते हुए, दो दशक में हम आगे निकल सकते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व कर सकते हैं. भारत दुनिया के लिए वृद्धि का इंजन बन जाएगा.” उन्होंने कहा कि ऐसा हमारे युवा दिमाग की विचारों की स्पष्टता से होगा, जिसे शिक्षक प्रेरणा देंगे और इसे संभव बनाएंगे.
शिक्षकों के क्षमता निर्माण के लिए केंद्र नवाचार, प्रौद्योगिकी का सहारा ले रहा : प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि केंद्र नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की भावना के अनुरूप शिक्षकों के निरंतर क्षमता निर्माण के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहा है. मंत्री ने यह टिप्पणी ‘द टीचर ऐप’ की शुरुआत के अवसर पर की, जिसे भारती एयरटेल फाउंडेशन द्वारा विकसित किया गया है और यह शिक्षकों के क्षमता निर्माण के लिए सर्मिपत है.
प्रधान ने कहा, ”शिक्षक ही भावी पीढ़ी का निर्माण करने वाले वास्तविक कर्मयोगी हैं. हम एनईपी 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षकों के निरंतर क्षमता निर्माण के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”प्रबुद्ध शिक्षक, प्रबुद्ध छात्रों का निर्माण करते हैं. जैसे-जैसे भारत ज्ञान-संचालित 21वीं सदी में आगे बढ़ रहा है, शिक्षक भविष्य के अवसरों का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि हमारे युवा विकास की कहानी का नेतृत्व करें.”



