यूनियन कार्बाइड कारखाने का बचा 307 टन कचरा जलना शुरू, 55 दिन में खाक होगा पूरा अपशिष्ट

Author: navabharat digital
UPDATED: Tue, 06 May 2025 01:37 PM
यूनियन कार्बाइड कारखाने का बचा 307 टन कचरा जलना शुरू, 55 दिन में खाक होगा पूरा अपशिष्ट
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इंदौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर पीथमपुर के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने का बचा 307 टन कचरा जलाए जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है और इस खेप के करीब 55 दिन के भीतर खाक होने का अनुमान है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिना जाता है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पीथमपुर में एक निजी कंपनी द्वारा संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के बचे 307 टन कचरे के निपटान की प्रक्रिया सोमवार देर शाम करीब सात बजकर 45 मिनट पर शुरू हुई।

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के 27 मार्च को जारी निर्देश के मुताबिक यूनियन कार्बाइड के बचे कचरे को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में पीथमपुर के संयंत्र में 270 किलोग्राम प्रति घंटे की अधिकतम दर से जलाया जा रहा है।

द्विवेदी ने बताया, ‘‘हमारा अनुमान है कि यूनियन कार्बाइड का पूरा कचरा अगले 50 से 55 दिन में जलकर खाक हो जाएगा।’’ उन्होंने बताया कि इस कचरे को भस्म किए जाने के दौरान पीथमपुर के संयंत्र से अलग-अलग गैसों और कणों के उत्सर्जन पर एक आॅनलाइन तंत्र द्वारा निगरानी की जा रही है।

द्विवेदी के मुताबिक इस तंत्र के जरिये पार्टिकुलेट मैटर, हाइड्रोजन क्लोराइड, सल्फर डाइआॅक्साइड, कार्बन मोनो आॅक्साइड, टोटल आॅर्गेनिक कार्बन, हाइड्रोजन फ्लोराइड और नाइट्रोजन आॅक्साइड के उत्सर्जन पर निगाह रखी जा रही है। इसके साथ ही, आस-पास के इलाकों में परिवेशी वायु गुणवत्ता की भी निगरानी की जा रही है।

उन्होंने बताया, ‘‘कचरा जलाने के अंतिम चरण में पीथमपुर के संयंत्र में नया सेंसर लगवाकर पहली बार मर्करी के उत्सर्जन की भी आॅनलाइन निगरानी की जा रही है।’’ द्विवेदी ने कहा कि इस संयंत्र में कचरा जलाए जाने का काम लगातार जारी है और फिलहाल तमाम उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर बने हुए हैं।

उन्होंने बताया कि कचरे को इस संयंत्र के भस्मक में डालने से पहले तय मात्रा में मिलाकर तौलने के लिए स्वचालित मशीनों का इंतजाम किया गया है। द्विवेदी के मुताबिक पूरा कचरा जलने के बाद बची राख का इस तरह सुरक्षित निपटारा किया जाएगा कि इससे आबो-हवा को नुकसान न हो।

उच्च न्यायालय के निर्देश के मुताबिक सरकार को कचरे को नष्ट किए जाने के बारे में 30 जून को अदालत में स्थिति रिपोर्ट पेश करनी है। भोपाल में बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे को सूबे की राजधानी से करीब 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर के संयंत्र में दो जनवरी को पहुंचाया गया था।

इस संयंत्र में तीन परीक्षणों के दौरान कुल 30 टन कचरा जलाया गया था। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय को विश्लेषण रिपोर्ट के हवाले से बताया गया था कि क्रमश? 135 किलोग्राम प्रति घंटा, 180 किलोग्राम प्रति घंटा और 270 किलोग्राम प्रति घंटा की दरों पर किए गए तीनों परीक्षणों के दौरान उत्सर्जन तय मानकों के भीतर पाए गए।

प्रदेश सरकार के मुताबिक यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और ‘‘अर्द्ध प्रसंस्कृत’’ अवशेष शामिल हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब ‘‘लगभग नगण्य’’ हो चुका है। बोर्ड के मुताबिक फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं हैं।

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