पहलगाम हमला सुरक्षा की बड़ी नाकामी, गृह मंत्री जिम्मेदारी स्वीकारें: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 21 May 2025 09:53 PM
पहलगाम हमला सुरक्षा की बड़ी नाकामी, गृह मंत्री जिम्मेदारी स्वीकारें: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि पहलगाम आतंकी हमला गृह मंत्रालय की बड़ी सुरक्षा विफलता है और गृह मंत्री अमित शाह को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस हमले को एक महीना हो चुका है, लेकिन इस घटना को अंजाम देने वाले आतंकवादी आखिर कब पकड़े जाएंगे.

रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक प्रयास अपनी जगह ठीक हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि निर्दोष भारतीय नागरिकों की हत्या करने वालों को पकड़कर दंडित किया जाए. उन्होंने 2008 के मुंबई आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय आतंकवादियों को कानून की जद में लाया गया था और पाकिस्तान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब किया गया था.

रमेश ने कहा, ”हम चाहते हैं कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को पकड़ा जाए. इस हमले को एक महीना पूरा होने को आया है. कूटनीतिक प्रयास ठीक हैं, लेकिन हमला करने वाले आतंकवादियों को पकड़ना और उन्हें दंडित करना जरूरी है.” उन्होंने राहुल गांधी पर भाजपा नेताओं के हमलों को लेकर पलटवार करते हुए कहा, ”जिन्ना को क्लीन चिट देकर उनकी तारीफ किसने की थी? जसवंत सिंह ने जिन्ना की प्रशंसा की थी. अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर तक बस यात्रा की थी. नवाज शरीफ के साथ नाश्ते पर कौन गया था? यह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थे.” रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ”जब आप हताश हो गए हैं, आपकी छवि धूमिल हो चुकी है तो सांसदों को विदेश भेज रहे हैं.” उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य संघर्ष में चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी और दोनों देशों के इसी गठजोड़ को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पहले ही सवाल उठा चुके हैं.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अब भाजपा की तरफ से सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है. पार्टी के ‘पूर्व सैनिक विभाग’ के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) रोहित चौधरी ने कहा, ”हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह लोगों को बताए कि पहलगाम हमला कैसे हुआ और कैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया गया. मैंने अपने करियर में कभी नहीं देखा कि आतंकवादी एक-एक आदमी को चुन-चुनकर मारते हैं, अपने जाने का सुरक्षित रास्ता खोजकर रखते हैं और निकल जाते हैं.” उन्होंने दावा किया कि यह सुरक्षा की बहुत बड़ी विफलता है और यह नाकामी गृह मंत्रालय की है. चौधरी ने कहा कि शाह को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि सुरक्षा का मामला गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है.

उन्होंने बताया कि शाह ने हमले से ठीक दो हफ्ते पहले सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की थी और दावा किया था कि सब कुछ ठीक है.
चौधरी ने दावा किया कि कथित तौर पर खुफिया जानकारी के आधार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जम्मू-कश्मीर दौरा रद्द हुआ था.
उन्होंने सवाल किया कि जब इस तरह की सूचना पहले से थी तो कोई एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए गए? चौधरी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल 100 फीसदी सफल रहे, लेकिन एक नेता के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी विफल रहे हैं.

आतंकवादियों ने बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की हत्या कर दी थी. मारे गए लोगों में ज्यादातर पर्यटक थे. इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने छह और सात मई की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभियान चलाकर पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे.

प्रधानमंत्री के आदेश पर परमेश्वर के खिलाफ हुई ईडी की छापेमारी; प्रतिशोध की राजनीति: कांग्रेस

कांग्रेस ने कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर से संबद्ध बताए जाने वाले शैक्षणिक संस्थानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी की बुधवार को निंदा की और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदेश पर यह कार्रवाई हुई है, जो प्रतिशोध तथा उत्पीड़न की राजनीति है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पार्टी खामोश नहीं होगी और विभिन्न मोर्चों पर ‘विफलताओं’ के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराती रहेगी. ईडी ने तुमकुरु और बेंगलुरु के बाहरी इलाके में कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर से संबद्ध बताए जा रहे शैक्षणिक संस्थानों में छापेमारी की.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तुमकुरु में ‘श्री सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज’ और ‘श्री सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ तथा बेंगलुरु के बाहरी इलाके में नेलमंगला में ‘श्री सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ में छापेमारी की गई. रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कांग्रेस कर्नाटक के गृहमंत्री के खिलाफ ईडी की छापेमारी की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करती है. डॉ. जी. परमेश्वर देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में, विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों के लिए महान योगदान दिया है.” उन्होंने आरोप लगाया कि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदेश पर की गई ईडी की कार्रवाई उत्पीड़न, प्रतिशोध और धमकी की राजनीति को दर्शाती है तथा प्रधानमंत्री इस तरह की राजनीति में महारत रखते हैं. रमेश ने कहा, ”पिछले दो वर्षों में कर्नाटक सरकार की उपलब्धियों से भाजपा स्पष्ट रूप से घबराई और चिंतित है. हम चुप नहीं बैठेंगे. हम विभिन्न मोर्चों पर प्रधानमंत्री की विफलताओं के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते रहेंगे.”

मनरेगा मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन हो, मूल्यांकन के लिए समिति बने: कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को सरकार से आग्रह किया कि कि देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजूदरी को 400 रुपये प्रतिदिन किया जाए और मजदूरी दर में बदलाव की आवश्यकता के मूल्यकांन के लिए एक समिति का गठन किया जाए. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक रिपोर्ट का उल्लेख किया और दावा किया कि आर्थिक मंदी के कारण पहले से अधिक परिवार मनरेगा के तहत रोजगार की तलाश कर रहे हैं.

रमेश ने एक बयान में कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी के असंवेदनशील रवैये और दूरर्दिशता की कमी के शुरुआती संकेत हमें तब मिलते हैं जब उन्होंने 2015 में संसद के पटल पर मनरेगा का मज.ाक उड़ाया था. उसके बाद के वर्षों में, विशेष रूप से कोविड????-19 महामारी के दौरान, मनरेगा ने निर्णायक रूप से अपनी उपयोगिता को साबित किया है. यह सामाजिक सुरक्षा की कुछ योजनाओं में से एकमात्र ऐसी योजना है जिन्हें सरकार क्रियान्वित कर सकती है.” उन्होंने कहा, ”2019-20 में महामारी से पहले जहां 6.16 करोड़ परिवारों ने इस योजना के तहत काम की मांग की थी, वहीं 2020-21 में यह संख्या लगभग 33 प्रतिशत बढ़कर 8.55 करोड़ तक पहुंच गई. इन करोड़ों परिवारों के लिए मनरेगा ही वह एकमात्र जीवनरेखा थी, जब सरकार के बिना योजना लगाए गए लॉकडाउन ने चारों ओर अफरा-तफरी फैला दी थी.” रमेश के अनुसार, ‘लिबटेक इंडिया’ द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट ने मनरेगा की मौजूदा स्थिति को लेकर कई चिंताजनक खुलासे किए हैं.

उन्होंने रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया, ”केवल सात प्रतिशत परिवारों को ही 100 दिनों का वादा किया गया रोजगार मिल पाता है. योजना के दायरे में भले ही बढ़ोतरी हो रही हो, शायद इसलिए क्योंकि आर्थिक मंदी के कारण और अधिक परिवार मनरेगा के तहत रोजगार की तलाश कर रहे हैं – लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच प्रति परिवार औसतन मिलने वाले काम के दिनों की संख्या घट गई है.” उनका कहना था, ”मनरेगा की संकल्पना मांग के आधार पर संचालित योजना के रूप में की गई थी. इसमें कार्यदिवस सरकारी बजट के बजाय काम के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों पर निर्भर होते थे. इसे साकार करने के लिए विशेष रूप से आर्थिक मंदी की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए बजट में पर्याप्त वित्तीय प्रावधान करना चाहिए.” रमेश ने कहा, ”स्थिर मजदूरी के एक दशक के लंबे संकट के बीच, मनरेगा मजदूरी में वृद्धि – जैसा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस न्याय पत्र में कल्पना की गई थी – बेहद आवश्यक है. आगामी केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी को 400 रुपये प्रति दिन तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ मनरेगा मजदूरी में वृद्धि की जानी चाहिए.”

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