भाजपा ने पौराणिक सरस्वती सभ्यता को बढ़ावा दिया, तमिल संस्कृति की प्राचीनता को किया खारिज

चेन्नई. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विश्वसनीय साक्ष्य के बिना पौराणिक सरस्वती सभ्यता को बढ़ावा दिया, लेकिन तमिल संस्कृति की प्राचीनता को खारिज कर दिया. स्टालिन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कीझाड़ी में खुदाई पर कार्बन उम्र निर्धारण पद्धति से निर्धारित पुरातन कलाकृतियां और अंतराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की ‘एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री’ (एएमएस) रिपोर्ट पेश किए जाने के बावजूद वे “अधिक सबूत” मांग कर रहे हैं. और “सबूत” यहां है.” स्टालिन ने कहा कि लेकिन इसके विपरीत प्रतिष्ठित इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के कड़े विरोध के बावजूद भाजपा ने पौराणिक सरस्वती सभ्यता को बढ़ावा देना जारी रखा है.

उन्होंने कहा कि वे (भाजपा नेता) ऐसा बिना किसी विश्वसनीय सबूत के करते हैं, जबकि तमिल संस्कृति की प्राचीनता को पूरी तरह से खारिज करते हैं. स्टालिन ने कहा कि जब बात कीझाड़ी और तमिल विरासत की स्थायी सच्चाई की आती है, तो भाजपा-आरएसएस का तंत्र पीछे हट जाता है, इसलिए नहीं कि सबूतों का अभाव है, बल्कि इसलिए कि सच्चाई उनकी पटकथा के अनुकूल नहीं है.

मुख्यमंत्री ने कहा, ”हमने अपने इतिहास को उजागर करने के लिए सदियों तक संघर्ष किया है. वे इसे मिटाने के लिए हर दिन संघर्ष करते हैं. दुनिया देख रही है. समय भी देख रहा है. कीलाड़ी.” केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की टिप्पणी पर स्टालिन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार तमिल लोगों की प्राचीनता को छिपाने और नष्ट करने की कोशिश कर रही है. शेखावत ने कहा था कि शिवगंगा जिले के कीलाड़ी में एक प्राचीन सभ्यता पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के निष्कर्षों को स्वीकार्य बनाने के लिए और अध्ययन की जरूरत है.

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