
मुंबई. मराठा आरक्षण के लिए नए आंदोलन की आशंका का सामना कर रहे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार मराठा और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) दोनों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार का इरादा दोनों समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का नहीं है. मराठा नेता मनोज जरांगे शुक्रवार से मुंबई में आरक्षण के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने वाले हैं.
जरांगे सभी मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग कर रहे हैं, जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो जाएंगे, लेकिन ओबीसी नेता इसका विरोध कर रहे हैं. कुनबी, ओबीसी श्रेणी में शामिल एक कृषि प्रधान जाति है. मुख्यमंत्री ने कहा, ”हम ओबीसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे और मराठों को पता होगा कि मेरी सरकार ने समुदाय के कल्याण के लिए काम किया है. हमारी सरकार द्वारा (मराठों को) दिया गया आरक्षण अब भी कानूनी रूप से मान्य है.”
फडणवीस ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए अन्य राज्यों में आरक्षण के मुद्दें हल हो गए हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर दृष्टिकोण अब भी सकारात्मक नहीं है.” उन्होंने कहा कि मराठों को पहले से ही 10 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है और अब भी आरक्षण की मांग है. उन्होंने कहा कि ओबीसी में 350 से अधिक उपजातियां हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, ”फिर भी हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि प्रदर्शनकारियों का क्या कहना है.” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है. मुख्यमंत्री ने कहा, ”हम उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार किए गए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं.” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मराठा विरोध को एक सामाजिक घटना के रूप में देखती है, न कि एक राजनीतिक मुद्दे के रूप में.



