प्रधान ने सभी कक्षाओं में वंदे मातरम् के सामूहिक गायन को एक परंपरा बनाने की अपील की

नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को प्रत्येक कक्षा में ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन को एक ‘शक्तिशाली’ परंपरा के रूप में स्थापित करने और इसे एक जन आंदोलन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया. वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र गीत एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में मार्गदर्शक का काम करेगा.

प्रधान ने कहा, ”दिल्ली विश्वविद्यालय में हमारे युवा साथी वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाएं और इसकी भावना के वाहक बनें. विश्वविद्यालय वंदे मातरम् की शाश्वत भावना को एक जन आंदोलन में बदलने और इससे भावी पीढि.यों को जोड़ने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा.” उन्होंने कहा, ”विश्वविद्यालय की प्रत्येक कक्षा में वंदे मातरम के सामूहिक गायन को एक शक्तिशाली परंपरा के रूप में स्थापित किया जाए, तभी यह एक जन आंदोलन के रूप में विकसित होगा. उस समय, हमने स्वतंत्रता के लिए वंदे मातरम् गाया था, आज वंदे मातरम् एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में हमारे मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा.” केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि रामजस कॉलेज के छात्रों के साथ सामूहिक रूप से इस राष्ट्रीय गीत को गाने का सौभाग्य प्राप्त होना प्रेरणादायक रहा.

उन्होंने कहा, ”लंबे संघर्षों और अनगिनत राष्ट्र-सेवकों के बलिदान के बाद, हमें 1947 में स्वतंत्रता मिली, वंदे मातरम् उस राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष था जिसने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया.” केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ गीत अक्षय नवमी के पवित्र अवसर पर लिखा गया माना जाता है, जो सात नवंबर 1875 को पड़ी थी.

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