अरावली पर्वतमाला में किसी भी तरह की छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी: मुख्यमंत्री शर्मा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 22 Dec 2025 10:08 PM
अरावली पर्वतमाला में किसी भी तरह की छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी: मुख्यमंत्री शर्मा
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जयपुर/नयी दिल्ली. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अरावली पर्वतमाला के लिए ‘100 मीटर’ के मापदंड को लेकर जारी विवाद के बीच सोमवार को कहा कि इस पर्वतमाला में किसी भी तरह की छेड़खानी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने झालावाड़ जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए संकल्पित है.

शर्मा ने कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा, “सोशल मीडिया मंचों पर ‘सेव अरावली’ अभियान व डीपी फोटो बदलने से काम नहीं चलता है. काम चलता है दृढ़ इच्छा शक्ति से, काम चलता है काम करने से… इस तरह से मत बरगलाइए. हम किसी भी तरह से अरावली के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देंगे. किसी तरह का खनन नहीं होने देंगे, ये हम आपको विश्वास दिलाते हैं.” कांग्रेस की राजस्थान इकाई के कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा की मांग को लेकर सोमवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया.

शर्मा, राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर झालावाड़ के दुधालिया में महिला सशक्तीकरण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे देश की आधी आबादी महिलाओं के सशक्तीकरण से ही देश का विकास संभव है. महिला हमारे परिवार का आधार है और राष्ट्र निर्माण की सच्ची शिल्पकार है.” उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में महिला शक्ति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और हमारी सरकार भी महिला उत्थान के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी. आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. वे केवल घर ही नहीं संभालती, बल्कि देश-प्रदेश को सशक्त करने में भी अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ‘डबल इंजन’ की सरकार ने पूरे प्रदेश में महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक कदम उठाए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जनप्रिय मुख्यमंत्री शर्मा राज्य को नई ऊचाईयों पर ले जाने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं और आज हमारा प्रदेश विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

सरकार अरावली की सुरक्षा के लिए है कटिबद्ध, कांग्रेस झूठ फैला रही है: भूपेंद्र यादव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सोमवार को कांग्रेस पर अरावली की नई परिभाषा के मुद्दे पर ‘गलत सूचना’ और ‘झूठ’ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पर्वत श्रृंखला के केवल 0.19 प्रतिशत हिस्से में ही कानूनी रूप से खनन किया जा सकता है. यादव ने यहां प्रेसवार्ता में कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार अरावली की सुरक्षा और पुनस्र्थापन के लिए ‘पूरी तरह से प्रतिबद्ध’ है.

उन्होंने आरोप लगाया, ”कांग्रेस ने अपने शासनकाल में राजस्थान में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की अनुमति दी, लेकिन वह अब इस मुद्दे पर भ्रम, गलत सूचना और झूठ फैला रही है.” उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिश पर उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुमोदित नई परिभाषा का उद्देश्य ‘अवैध खनन पर अंकुश लगाना’ और ‘कानूनी रूप से टिकाऊ खनन’ की अनुमति देना है तथा वह भी तब होगा जब भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) संपोषणीय खनन के लिए प्रबंधन योजना (एमपीएसएम) तैयार कर लेती है.

सूत्रों ने कहा कि आईसीएफआरई उन क्षेत्रों की पहचान करेगी जहां केवल असाधारण और वैज्ञानिक रूप से उचित परिस्थितियों में ही खनन की अनुमति दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि अध्ययन अरावली परिदृश्य के भीतर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील, संरक्षण-महत्वपूर्ण और बहाली-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का भी निर्धारण करेगा जहां खनन पर सख्त प्रतिबंध होगा.

यादव ने कहा कि कानूनी रूप से स्वीकृत खनन वर्तमान में अरावली क्षेत्र के केवल एक बहुत छोटे हिस्से में होगा, जो राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के 37 अरावली जिलों के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 0.19 प्रतिशत है. दिल्ली के पांच जिले अरावली क्षेत्र में हैं जहां किसी भी खनन की अनुमति नहीं है.

यादव ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के अनुसार, अरावली क्षेत्र में कोई भी नया खनन पट्टा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद द्वारा संपूर्ण परिदृश्य के लिए सतत खनन प्रबंधन योजना तैयार नहीं कर ली जाती.
मौजूदा खदानें केवल तभी परिचालन जारी रख सकती हैं, जब वे समिति द्वारा निर्धारित टिकाऊ खनन मानदंडों का सख्ती से पालन करती हैं.

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