
देहरादून/अगरतला. उत्तराखंड में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा हत्याकांड में चौतरफा दबाव के बीच देहरादून की पुलिस ने मंगलवार को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया और साथ ही कहा कि मामले की अब तक की जांच में नस्लीय दुर्व्यवहार का कोई सबूत नहीं मिला है.
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि पुलिस हत्याकांड में शामिल फरार मुख्य आरोपी नेपाल के यज्ञराज अवस्थी को पकड़ने के बहुत करीब पहुंच चुकी है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने अवस्थी पर घोषित 25 हजार रुपये के इनाम को भी बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है.
पुलिस अधिकारी ने कहा कि नौ दिसंबर को हुई इस घटना के संबंध में पुलिस ने सभी सीसीटीवी फुटेज एकत्रित कर लिए हैं और पूरी वारदात भीड़भाड़ वाली जगह पर शाम सवा छह बजे के बाद 40-50 सेकेंड के भीतर हुई. उन्होंने कहा, ”घटना के पीछे की पूरी सच्चाई एंजेल पर चाकू से वार करने वाले मुख्य आरोपी अवस्थी की गिरफ्तारी के बाद ही पता चल पाएगी.” वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आरोपी और पीडि़त पक्ष एक दूसरे को नहीं जानते थे और पूरी घटना ‘इन द हीट ऑफ द मोमेंट’ में हुई.
यह पूछे जाने पर कि क्या वारदात में शामिल चाकू बरामद हो गया है, एसएसपी ने कहा कि अवस्थी ने पास में खड़ी अंडे की ठेली से उसका चाकू उठाकर एंजेल पर वार किया था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में सामने आया है कि आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था. एसएसपी ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित खबरों में घटना को नस्लीय दुर्व्यवहार से जोड़े जाने को गलत बताते हुए कहा, ”घटना वाले दिन (नौ दिसंबर 2025) से लेकर 26 दिसंबर (जब एंजेल की मृत्यु हुई) तक, पुलिस के साथ बातचीत में किसी ने भी नस्लीय दुर्व्यवहार या हिंसा की शिकायत नहीं की.” एसएसपी ने कहा कि इसके अलावा, इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में भी नस्लीय दुर्व्यवहार का कोई आरोप नहीं है.
उन्होंने कहा कि तहरीर में पीडि़त पक्ष ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने की बात कही थी लेकिन जांच में पता चला कि आरोपियों में शामिल दो व्यक्ति स्वयं अनुसूचित जनजाति के हैं. पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच का कोई पहलू छूट न जाए, इसके लिए एक पुलिस क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी गयी है. उन्होंने कहा कि अब तक की विवेचना एसआईटी को सौंप दी गयी है. एसएसपी ने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी ढंग से की जा रही है और कोई भी नया साक्ष्य मिलने पर उसे विधिवत दर्ज किया जाएगा.
देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में हुई इस घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, नौ दिसंबर को आरोपियों में से एक मणिपुर निवासी सूरज ख्वास द्वारा अपने बेटे के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पार्टी देने के लिए अपने पांच मित्रों को बुलाया गया था और उसी दौरान उनके बीच ‘दोस्ताना हंसी-मजाक’ हुआ.
एसएसपी ने कहा, ”पीडि़त पक्ष को कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक लगीं, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ. इसके बाद हुए झगड़े में एंजेल चकमा और उसका छोटा भाई माइकल चकमा घायल हो गए. एंजेल ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया.” उन्होंने कहा कि झगड़े में एंजेल चकमा की रीढ. की हड्डी और गर्दन में घातक चोटें आयी थीं. उन्होंने बताया कि घटना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने छह आरोपियों में से पांच को पकड़ लिया है जिनमें से दो नाबालिगों को न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया है.
सिंह ने कहा कि फरार अवस्थी को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें प्रयास कर रही हैं और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
एसएसपी ने कहा कि देहरादून में देश भर से छात्र पढ.ने आते हैं जिनमें से पूर्वोत्तर के भी करीब 2,000 से अधिक छात्र हैं. . सिंह ने कहा कि त्रिपुरा के ही करीब 250 छात्र यहां पढ.ाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सबकी सुरक्षा पुलिस की जिम्मेदारी है और इस तरह की वारदात करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
उत्तराखंड सरकार एंजेल चकमा हत्याकांड के दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगी : त्रिपुरा के मुख्यमंत्री
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मंगलवार को कहा कि उनके उत्तराखंड के समकक्ष पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उत्तरी राज्य की सरकार एंजेल चकमा की हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी. पूर्वोत्तर राज्य के 24 वर्षीय छात्र चकमा पर नौ दिसंबर को छह लोगों ने हमला किया था, जिसमें वह जख्मी हो गए थे और 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.
त्रिपुरा के दो मंत्रियों ने उनाकोटि जिले के मचमारा स्थित पीडि़त के घर का दौरा किया और उसके परिवार को 9.12 लाख रुपये के चेक सौंपे. यह आर्थिक सहायता उत्तराखंड और त्रिपुरा सरकारों की ओर से प्रदान की गई है. साहा ने संवाददाताओं से कहा, “पैसा एंजेल चकमा का जीवन वापस नहीं लाएगा. हम एमबीए छात्र की हत्या की कड़ी निंदा करते हैं. मैंने कल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की थी, जिन्होंने मुझे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.” उन्होंने कहा कि कुल छह आरोपियों में से पांच को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि छठे को गिरफ्तार करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि चकमा छात्र संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उनसे मुलाकात कर इस घटना पर चर्चा की. उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि उत्तराखंड सरकार हत्या के मामले में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए कदम उठाएगी.” मंत्री टिंकू रॉय और संताना चकमा ने मृत छात्र के परिवार को दो चेक सौंपे. त्रिपुरा सरकार ने पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की, जबकि उत्तराखंड सरकार ने 4.12 लाख रुपये दिए हैं.
रॉय ने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के संपर्क में हैं. वह यह सुनिश्चित करेंगे कि हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिले.” इस बीच, त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने देहरादून में एक होनहार आदिवासी छात्र की हत्या की निंदा की. उन्होंने दावा किया, “पूर्वोत्तर के लोगों पर हमले का यह पहला मामला नहीं है. इस क्षेत्र के छात्रों के साथ नस्ली भेदभाव के उदाहरण मौजूद हैं. यह आरएसएस के हिंदू-हिंदी-हिंदुस्तान के एजेंडे का परिणाम है.”



