अमेरिका से ₹45 लाख करोड़ की ट्रेड डील: भारत के दवा, विमान के पुर्जों और आभूषण सेक्टर को बड़ी राहत, समझें गणित

Author: navabharat digital
UPDATED: Sat, 07 Feb 2026 03:16 PM
अमेरिका से ₹45 लाख करोड़ की ट्रेड डील: भारत के दवा, विमान के पुर्जों और आभूषण सेक्टर को बड़ी राहत, समझें गणित
ऑडियो सुनें

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर ( करीब 45,29,069.80 रुपये) के व्यापार समझौते के लिए एक अंतरिम ढांचे पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में पैठ बढ़ाने का एक बड़ा मौका भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना और भविष्य के व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव रखना है।

सवाल: इस डील में भारत के लिए सबसे बड़ी जीत क्या हैं?
जवाब: भारत को इस समझौते के तहत अपने प्रमुख निर्यात क्षेत्रों- फार्मास्यूटिकल्स (जेनेरिक दवाएं), रत्न और आभूषण, और विमान के पुर्जों- के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिली है। अमेरिका ने अंतरिम समझौता पूरा होने के बाद इन भारतीय उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर टैरिफ (आयात शुल्क) हटाने की प्रतिबद्धता जताई है।

सवाल: क्या भारतीय ऑटो और विमानन सेक्टर को कोई विशेष छूट मिली है?
जवाब: बिल्कुल। विमानन क्षेत्र में, अमेरिका उन विमानों और उनके पुर्जों से टैरिफ हटा देगा जिन पर पहले एल्युमीनियम, स्टील और तांबे के आयात से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों के तहत शुल्क लगता था। वहीं, ऑटो सेक्टर के लिए, भारत को ‘प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट कोटा’ का लाभ मिलेगा। इसका सीधा अर्थ है कि भारतीय ऑटो पार्ट निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में अन्य गैर-प्राथमिकता वाले आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में शुल्क में रियायत मिलेगी, जो उन्हें एक प्रतिस्पर्धी बढ़त दिलाएगा।

सवाल: भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए क्या शर्तें हैं?
जवाब: जेनेरिक दवाओं और फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआइ्र) को इस ढांचे में शामिल किया गया है, जो भारतीय दवा निर्माताओं के लिए राहत की बात है। हालांकि, यह धारा 232 (Section 232) के तहत अमेरिकी जांच के निष्कर्षों के अधीन होगा। इसके बावजूद, समझौते का उद्देश्य भारतीय दवा कंपनियों के लिए बाजार के रास्ते खुले रखना है, जो अमेरिका में सस्ती दवाओं की आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

सवाल: टैरिफ को लेकर क्या नियम तय हुए हैं?
जवाब: ढांचे के तहत, अमेरिका शुरुआत में भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ लागू करेगा। लेकिन, महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतरिम समझौता फाइनल होने के बाद, अमेरिका ने जेनेरिक दवाओं, हीरे और विमान के पुर्जों जैसे कई भारतीय उत्पादों पर इन शुल्कों को हटाने का वादा किया है। इसके अलावा, भविष्य के व्यापक समझौते में टैरिफ को और कम करने की गुंजाइश भी रखी गई है।

सवाल: टेक्नोलॉजी और डिजिटल ट्रेड के मोर्चे पर क्या हासिल हुआ?
जवाब: यह डील सिर्फ पुराने उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) और डेटा सेंटर्स में उपयोग होने वाले सामानों के व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। दोनों देशों ने सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने और तीसरे देशों की ‘नॉन-मार्केट पॉलिसी’ से निपटने के लिए सहयोग करने की बात कही है। साथ ही, डिजिटल व्यापार में भेदभावपूर्ण प्रथाओं को खत्म करने पर भी सहमति बनी है।

सवाल: दोनों देशों के लिए इस समझौते के क्या मायने हैं?
जवाब: यह अंतरिम ढांचा भारत और अमेरिका के बीच एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में पहला ठोस कदम है। जहां एक तरफ यह भारतीय निर्यातकों के लिए अनुपालन की चुनौतियों को कम करेगा, वहीं दूसरी तरफ यह दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि इस ढांचे को अंतिम रूप कितनी जल्दी दिया जाता है और टैरिफ हटाने की समयसीमा क्या होगी।

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By navabharat digital