मुख्यमंत्री शिवकुमार ने शिकायत निवारण के लिए ‘प्रजासेवा विभाग’ स्थापित करने की घोषणा की

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने शनिवार को जनता की शिकायतों के समाधान के लिए ‘प्रजासेवा’ नाम का एक नया विभाग बनाने की घोषणा की और कहा कि इसका नेतृत्व एक मंत्री करेंगे। उन्होंने यहां कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा कि जिला (के प्रभारी) मंत्रियों को सभी विधानसभा क्षेत्रों में नियमित रूप से जनता से संवाद करना होगा ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।

कैबिनेट बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि 31 मई 2000 से पहले बन चुकी इमारतों में रहने वाले पात्र लोगों को स्थायी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने के संबंध में 15 दिन का समय दिया जाएगा और इसके लिए उन्हें फोटो और जीपीएस साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। शिवकुमार ने सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “आज हमने जो पहला फैसला लिया है, वह जनता की शिकायतों से जुड़ा है। लोगों के सामने कई समस्याएं हैं। जब जिला मंत्री दौरे करते हैं, जब मुख्यमंत्री लोगों से मिलते हैं या जब विरोध प्रदर्शन होते हैं, तो हमें उनकी भावनाओं और समस्याओं का जवाब देना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि सरकार एक अलग ‘प्रजासेवा विभाग’ बनाएगी, जिसके लिए एक विशेष मंत्री और अलग प्रशासनिक व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विभाग शिकायतों की जांच करेगा और प्रशासन की ओर से समय पर जवाब सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, “हम एक अलग मंत्रालय के रूप में प्रजासेवा विभाग (लोक सेवा विभाग) बना रहे हैं। इस विभाग की जिम्मेदारी एक अलग मंत्री को सौंपी जाएगी।”

शिवकुमार ने कहा कि शिकायतों की निगरानी व्यवस्था का नेतृत्व एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी करेंगे और मुख्यमंत्री को सीधे प्राप्त होने वाली शिकायतों सहित मंत्रियों को दी जाने वाली शिकायतें जांच और आगे की कार्रवाई के लिए इस विभाग के माध्यम से भेजी जाएंगी। इस पहल के तहत जिला मंत्रियों के लिए यह अनिवार्य किया जाएगा कि वे स्थानीय विधायकों की मौजूदगी में तालुका स्तर पर हर सप्ताह शिकायत निवारण और जनसंपर्क बैठकें करें। उन्होंने कहा, “सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के लिए जिला मंत्रियों को हर सप्ताह एक तालुका का दौरा करना होगा और प्रजासेवा विभाग के तहत जनता से संवाद तथा शिकायत निवारण बैठकें करनी होंगी।”

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