
वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने द्विदलीय समर्थन के साथ एक ऐसे विधेयक को आगे बढ़ाने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान किया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस और ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देगा। इस कदम का असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है।
सीनेट ने मंगलवार को 86-12 मतों से ‘क्लोचर प्रस्ताव’ को मंजूरी दी, जिससे ंिलडसे ओ ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026 को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया। ‘क्लोचर’ अमेरिकी सीनेट की एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी मुद्दे पर बहस और उससे जुड़ी कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जाती है और इसके बाद अंतिम मतदान कराया जाता है।
अमेरिकी सीनेट में यह मतदान दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर ंिलडसे ग्राहम को अंतिम विदाई देने के लिए सीनेटरों के एकत्र होने के कुछ घंटे बाद हुआ। सीनेटरों ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ बैठक के बाद इस प्रस्ताव पर मतदान किया। जेलेंस्की दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर ंिलडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अमेरिका आए थे और मतदान के दौरान सीनेट की गैलरी में मौजूद थे। उन्होंने सीनेटरों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन भी किया।
रिपब्लिकन सीनेटर ंिलडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल एक साल से अधिक समय से रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले इस विधेयक पर काम कर रहे थे। राष्ट्रपति ट्रंप के आग्रह पर इसमें ईरान को भी शामिल किया गया। ब्लूमेंथल ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार भी देता है।
उन्होंने कहा, ”इसे इस तरह तैयार किया गया है कि हमारे सहयोगी देशों को निशाना न बनाया जाए और चीन तथा भारत पर कार्रवाई हो। स्पष्ट रूप से कहें तो चीन और भारत यहां मुख्य खरीदार हैं। वे रूस के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा खरीदते हैं, जिससे रूस की युद्ध मशीन को मदद मिलती है।”
इस विधेयक को 62 सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है और 100 सदस्यीय सीनेट में इसके पारित होने की व्यापक संभावना है। हालांकि, प्रतिनिधि सभा में इसे कुछ विरोध का सामना करना पड़ सकता है, जहां डेमोक्रेट राष्ट्रपति ट्रंप के शुल्क लगाने के अधिकारों को बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। ंिलडसे ओ ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026 के तहत रूस और यूक्रेन में उसके युद्ध का समर्थन करने वाले पक्षों पर प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।
विधेयक में रूसी अधिकारियों, अरबपतियों (ओलिगार्क), उनके परिवारों, विदेशी नागरिकों, रूसी बैंकों और वित्तीय संस्थानों तथा रूस के ‘शैडो फ्लीट’ को निशाना बनाने का प्रावधान है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति उन देशों से आयातित वस्तुओं पर लक्षित शुल्क लगा सकेंगे, जो बड़ी मात्रा में रूसी तेल या गैस खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करते हैं।
विधेयक की धारा 113 में रूसी ईंधन के सबसे बड़े पांच खरीदार देशों या प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर विशेष जोर दिया गया है और उन पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन के अलावा रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।



