मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी और गाली-गलौज करने के आरोप में मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह को बुधवार को निलंबित कर दिया गया। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि भोपाल के पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने मामले की विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना मंगलवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की युवा शाखा की ओर से आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान हुई थी। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
इसमें प्रदर्शनकारी ‘जय जोहार’ के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। कथित वीडियो में थाना प्रभारी प्रदर्शनकारियों के नारे लगाने पर आपत्ति जताते और आदिवासी छात्रों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य आदिवासी संगठनों ने थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घटना को गंभीर और निदनीय बताते हुए कहा कि ‘जोहार’ आदिवासी संस्कृति, पहचान, स्वाभिमान और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह अभिवादन प्रेम, आदर और भाईचारे का संदेश देता है तथा आदिवासी संस्कृति और अस्मिता का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा कि पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल नागरिकों को अपमानित करने के बजाय उनके अधिकारों की रक्षा के लिए होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि पुलिसकर्मी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है, तो उसकी जवाबदेही तय की जाए और उसके खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।