कोलंबो. नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने स्वीकार किया है कि देश में आर्थिक सुधारों की कोई तुक नहीं है. उन्होंने कहा कि नकदी संकट से जूझ रहे देश की अर्थव्यवस्था ही नहीं है, तो आर्थिक सुधार क्या करें. उन्होंने एक नये आर्थिक मॉडल की पैरवी की है. यह द्वीपीय राष्ट्र विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी के चलते 1948 में अपनी आजादी के बाद के सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है.
श्रीलंका ने अप्रैल के मध्य में विदेशी मुद्रा संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय ऋण चूक की घोषणा की थी. विक्रमसिंघे ने सोमवार को ‘श्रीलंका आर्थिक शिखर सम्मेलन 2022’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को आर्थिक प्रणालियों के जरिये ठीक नहीं किया जा सकता है. ‘डेली लंका मिरर’ अखबार ने विक्रमसिंघे के हवाले से कहा, ‘‘हमारे पास अर्थव्यवस्था को सुधारने की कोई योजना नहीं है. हम अर्थव्यवस्था को क्या सुधारें जब हमारे पास अर्थव्यवस्था ही नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम एक नयी अर्थव्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं.’’