
दुर्ग. छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सोमवार को दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इसी सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चुनाव लड़ रहे हैं. जोगी ने कहा कि उनकी लड़ाई मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार’ के खिलाफ है. राज्य की 90 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए सात और 17 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा.
दुर्ग कलेक्टर कार्यालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए जोगी ने कहा, ”मैंने पाटन क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया है. मेरी लड़ाई भूपेश से नहीं बल्कि भ्रष्टाचार से है. पाटन के इतिहास में पहली बार ऐसा चुनाव होने जा रहा है, अन्यथा अब तक यहां एक ही परिवार के ‘चाचा-भतीजे’ के बीच चुनाव होता आया था.” उनका इशारा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके भतीजे भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल की ओर था.
जोगी ने कहा, ”मैं सिर्फ एक चेहरा हूं, यह पाटन के लोग हैं जो चुनाव लड़ रहे हैं. ये भ्रष्टाचार, परिवारवाद, वादा खिलाफी और शराब खोरी से पीड़ित पाटन वासी हैं.” उन्होंने कहा, ”मैं ‘बदला’ लेने के लिए नहीं बल्कि ‘बदलाव’ के लिए पाटन से चुनाव लड़ रहा हूं.” उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार लोग किसी राजनीतिक नेता को नहीं बल्कि अपने बेटे को वोट देंगे. पाटन उन 70 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है जहां 17 नवंबर को दूसरे चरण में मतदान होगा. बीस विधानसभा सीटों पर सात नवंबर को पहले चरण में मतदान होगा.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सोमवार को अपनी पारंपरिक पाटन सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया. बघेल इस सीट से पांच बार 1993, 1998, 2003, 2013 और 2018 में चुने गए हैं. साल 2008 में वह भाजपा के विजय बघेल से विधानसभा चुनाव हार गए थे. विजय बघेल उनके भतीजे भी हैं.
इस सीट पर भाजपा ने एक बार फिर विजय बघेल को मैदान में उतारा है, जो दुर्ग से लोकसभा सांसद हैं. भूपेश बघेल और विजय बघेल कुर्मी जाति से हैं जो राज्य में एक प्रभावशाली ओबीसी समुदाय है. इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में कुर्मी मतदाता हैं. जेसीसी (जे) ने पिछला चुनाव बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन में लड़ा था. इस गठबंधन ने सात सीटें जीती थी.
साल 2000 से 2003 तक राज्य में कांग्रेस सरकार का नेतृत्व करने वाले अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होने के बाद 2016 में जेसीसी (जे) का गठन किया था और 2018 का विधानसभा चुनाव बसपा के साथ गठबंधन में लड़ा. हालांकि जेसीसी (जे) चुनाव परिणाम को प्रभावित नहीं कर सकी, लेकिन पारंपरिक रूप से भाजपा और कांग्रेस के प्रभुत्व वाले राज्य की राजनीति में पैठ बनाने में सफल रही.
साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस लंबे अंतराल के बाद सत्ता में लौटी. पार्टी ने कुल 90 में से 68 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 15 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही. जेसीसी (जे) को पांच और उसकी सहयोगी बसपा को दो सीटें मिलीं थी. इस बार के चुनाव में जेसीसी (जे) ने किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया है. पिछले चुनाव में जेसीसी (जे) का वोट शेयर 7.6 प्रतिशत था.
पार्टी के विधायक अजीत जोगी और देवव्रत सिंह की मृत्यु के बाद हुए उपचुनावों में जेसीसी (जे) दो विधानसभा क्षेत्रों मरवाही और खैरागढ़ हार गई थी. वहीं पार्टी ने दो अन्य विधायकों धर्मजीत सिंह और प्रमोद शर्मा को निष्कासित कर दिया है. अब कोटा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी पार्टी की एकमात्र विधायक हैं.



