गुजरात में निजी बंदरगाहों के स्वामित्व को लेकर अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का प्रयास: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 25 Sep 2024 07:07 PM
गुजरात में निजी बंदरगाहों के स्वामित्व को लेकर अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का प्रयास: कांग्रेस

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नयी दिल्ली/जम्मू. कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि गुजरात में निजी बंदरगाहों के स्वामित्व से संबंधित रियायत अवधि में अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक बार फिर यह कहा कि अदाणी समूह के मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन होना चाहिए. अमेरिकी संस्था ‘हिंडेनबर्ग रिसर्च’ की रिपोर्ट में अदाणी समूह पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे और इसको लेकर कांग्रेस इस कारोबारी समूह पर निरंतर हमले कर रही है. अदाणी समूह ने सभी आरोपों को खारिज किया है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”गुजरात सरकार निजी बंदरगाहों को ‘बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (बूट) के आधार पर 30 साल की रियायत अवधि प्रदान करती है, जिसके बाद स्वामित्व गुजरात सरकार को हस्तांतरित हो जाता है. इस मॉडल के आधार पर, अदानी पोर्ट्स का वर्तमान में मुंद्रा, हजीरा और दाहेज बंदरगाहों पर नियंत्रण है. 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, अदानी पोर्ट्स ने गुजरात मैरीटाइम बोर्ड (जीएमबी) से इस रियायत अवधि को और 45 साल बढ़ाकर कुल 75 साल करने का अनुरोध किया.” उन्होंने कहा कि यह 50 साल की अधिकतम स्वीकार्य अवधि से बहुत अधिक था, लेकिन जीएमबी ने गुजरात सरकार से ऐसा करने का अनुरोध करने में जल्दबाजी की.

उन्होंने दावा किया, ”इस दिन-दहाड़े लूट के कम से कम दो गंभीर परिणाम हैं. अदाणी पोर्ट्स गुजरात के बंदरगाह क्षेत्र पर एकाधिकार हासिल कर लेगा, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचेगा और आम आदमी के लिए कीमतें बढ़ेंगी. अदाणी पोर्ट्स का मूल्यांकन बढ़ेगा और उधार लेने की लागत कम होगी. पुनर्वार्ता या प्रतिस्पर्धी बोली के लिए प्रक्रिया को खोलने में विफल रहने से गुजरात सरकार को राजस्व में करोड़ों रुपये का नुकसान होगा.” रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी है तो अदाणी के लिए सब कुछ मुमकिन है! उन्होंने कहा कि इसलिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच जरूरी है.

बड़े उद्योगपतियों के लिए रास्ता साफ करने के वास्ते जीएसटी, नोटबंदी को हथियार बनाया गया : राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र की ‘मेक इन इंडिया’ पहल पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि अदाणी और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के लिए रास्ता साफ करने के वास्ते वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया.

जम्मू जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा पर विरोधियों को डराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर (आईटी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

जम्मू जिले के साथ छह अन्य जिलों में एक अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में मतदान होगा.
कांग्रेस नेता ने रैली को संबोधित करते हुए दावा किया, ”वे (भाजपा) ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा उद्योग की बात कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सारे ठेके अदाणी जैसे लोगों को मिल रहे हैं. एक इजराइली कंपनी हथियार बना रही है और अदाणी अपना ‘लेबल’ चिपका रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”इजराइल की कंपनी ड्रोन बना रही है लेकिन लेबल अदाणी का है. वे कहते हैं कि ये ‘मेड इन इंडिया’ है लेकिन ऐसा कैसे? ये ‘मेड इन इंडिया’ नहीं बल्कि इजराइल के बनाए हथियार हैं, और पूरे देश में यही हाल है.” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अदाणी और अंबानी जैसे अरबपतियों के लिए काम कर रही है.

राहुल गांधी ने कहा, ”जीएसटी जम्मू के उद्यमियों और छोटे एवं मध्यम व्यवसायों को निशाना बनाने का एक हथियार था. उसी तरह नोटबंदी को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया.” उन्होंने आरोप लगाया, ”ये नीतियां नहीं बल्कि हथियार हैं और इसका लक्ष्य अदाणी और अंबानी जैसे लोगों के लिए रास्ते साफ करना था. गलत जीएसटी कार्यान्वयन और नोटबंदी ने देश भर में लाखों छोटे व्यवसायों को बर्बाद कर दिया.” उन्होंने कहा कि कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हवाई अड्डे, बंदरगाह, सड़कें, रक्षा हथियार और यहां तक ??कि सेब भी अदाणी के नियंत्रण में हैं.

दुबे के पत्र पर कांग्रेस ने कहा : लोकतंत्र का मजाक उड़ा रही है भाजपा

कांग्रेस ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता निशिकांत दुबे के उस पत्र को लोकतंत्र का मजाक करार दिया जिसमें कहा गया है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसदीय समिति के पास आए करीब 1.25 करोड़ प्रतिवेदनों की जांच होनी चाहिए. पार्टी की गुजरात इकाई के अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह दावा भी किया कि हो सकता है कि दुबे जो दावा कर रहे हैं वो भाजपा के ‘चट्टे-बट्टों’ का किया धरा हो.

गोहिल ने कहा, ”ये लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं. उनको लोकतंत्र में विश्वास नहीं है. अगर इतने बड़े देश में डेढ़ प्रतिशत लोग विचार जाहिर कर रहे हैं तो इसमें भी इनको दर्द होता है तो साफ है कि इन्हें लोकतंत्र में विश्वास नहीं है.” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि दुबे को मंत्री बनाया जाना चाहिए था.

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसदीय समिति को मिले करीब 1.25 करोड़ प्रतिवेदनों को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि गृह मंत्रालय के स्तर पर इनके स्रोत की जांच होनी चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि इतनी अधिक संख्या में आवेदन मिलने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और चीन की भूमिका हो सकती है. दुबे ने संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल को लिखे एक पत्र में कहा कि इस जांच के दायरे में कट्टरपंथी संगठनों, जाकिर नाइक जैसे व्यक्तियों और पाकिस्तान की इंटर-र्सिवसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) व चीन जैसी विदेशी शक्तियों के साथ ही उनके छद्म प्रतिनिधियों की संभावित भूमिका को भी शामिल किया जाना चाहिए.

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