भीमा कोरेगांव मामला : चिकित्सा आधार पर न्यायालय ने वरवर राव को जमानत दी

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी पी. वरवर राव को चिकित्सकीय आधार पर बुधवार को जमानत दे दी. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने शीर्ष अदालत में राव (82) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वह ‘‘राष्ट्र विरोधी गंभीर गतिविधियों’’ में शामिल हैं.

यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुणे पुलिस का दावा है कि इस भाषण की वजह से अगले दिन भीमा-कोरेगांव में ंिहसा फैली और इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों के माओवादियों से संबंध हैं. मामले की जांच बाद में एनआईए को सौंप दी गई थी.

राव को 28 अगस्त 2018 को हैदराबाद स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था. पुणे पुलिस ने आठ जनवरी 2018 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं तथा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. न्यायमूर्ति यू. यू. ललित, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एक पीठ ने पाया कि कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता राव का स्वास्थ्य अभी उतना बेहतर नहीं हुआ है कि उन्हें दी गई अंतरिम जमानत वापस ले ली जाए. पीठ ने यह भी कहा कि राव की उम्र 82 साल है और वह पहले ही करीब ढाई साल हिरासत में बिता चुके हैं.

एनआईए की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू ने पीठ से कहा कि राव कोई ‘‘सामान्य अपराधी’’ नहीं है और कुछ मामलों में, अगर अपराध गंभीर और राष्ट्र को प्रभावित करने वाले हैं तो उम्र कारक नहीं होनी चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि मामले में आरोप पत्र दायर किया जा चुका है, लेकिन कुछ आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है और आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए मौजूदा मामला अदालत के समक्ष नहीं लाया गया है.

पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (राव) के स्वास्थ्य में अभी इतना सुधार नहीं हुआ है कि उन्हें पहले दी गई जमानत वापस ले ली जाए.’’ अदालत ने कहा, ‘‘परिस्थितियों पर पूरी तरह गौर करने के बाद हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता चिकित्सकीय आधार पर जमानत के हकदार हैं.’’ पीठ ने उस शर्त को भी हटा दिया जो पिछले साल 22 फरवरी को बंबई उच्च न्यायालय के आदेश में लगाई गई थी. उस आदेश में राव को चिकित्सा आधार पर दी गई जमानत की अवधि छह महीने तक सीमित कर दी गई थी.

तेलुगु कवि राव ने बंबई उच्च न्यायालय के 13 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया गया था. शीर्ष अदालत ने राव को जमानत देते हुए कहा कि वह निचली अदालत की अनुमति के बिना ग्रेटर मुंबई से बाहर न जाएं. अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता किसी भी तरह से अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग न करें, न ही वह किसी गवाह से संपर्क करें तथा जांच को किसी भी तरह प्रभावित करने की कोशिश न करें.’’ पीठ ने स्पष्ट किया कि राव को जमानत केवल उनके स्वास्थ्य के आधार पर दी गई है.

राव भीमा कोरेगांव मामले में जमानत पाने वाले दूसरे शख्स हैं. इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय ने कार्यकर्ता व वकील सुधा भारद्वाज को पिछले साल मामले में जमानत दी थी. जिरह के दौरान राव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने उनकी चिकित्सा स्थिति का हवाला दिया और कहा कि मामले में आरोप भी तय नहीं किए गए हैं.

ग्रोवर ने कहा कि राव पार्किंसन के शुरुआती चरण की चपेट में है और मामले में अभी सुनवाई तक शुरू नहीं हुई है. एएसजी ने हालांकि दलील दी कि राव की स्थिति अब स्थिर है. वहीं, मुंबई में राव के वकील सत्यनारायण अय्यर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि न्यायालय के फैसले के बाद उनके मुवक्किल काफी राहत महसूस कर रहे हैं. अय्यर ने कहा, ‘‘राव की सेहत अब भी ठीक नहीं है. वह कई बीमारियों से ग्रस्त हैं. वह चिकित्सा आधार पर जमानत को स्थायी करने के न्यायालय के आदेश से राहत महसूस कर रहे हैं और खुश हैं.’’

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