
दुबई. भारत ने बुधवार को वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी28 में विश्व के नेताओं से ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ प्रक्रिया के माध्यम से पेरिस समझौते को अक्षरश: लागू करने का अनुरोध किया. इस दौरान भारत ने समानता और जलवायु न्याय के सिद्धांतों पर भी जोर दिया. सीओपी28 में एक ऐतिहासिक जलवायु समझौता हुआ है जिसमें जीवाश्म ईंधन का उपयोग चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और ऊर्जा प्राप्त करन के तरीके में बदलाव करने की अपील की गई है.
सीओपी28 के समापन सत्र में पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि सम्मेलन के दौरान हुए सामूहिक प्रयासों ने पेरिस में निर्धारित तापमान लक्ष्यों को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करके दुनिया को सकारात्मक संकेत दिये हैं. उन्होंने कहा, “आगे का रास्ता समानता और जलवायु न्याय पर आधारित होना चाहिए, आइए हम ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ प्रक्रिया के माध्यम से पेरिस समझौते को अक्षरश: लागू करें.” लगभग दो सप्ताह तक गहन बातचीत के बाद पहला ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ समझौता हुआ है, जिसमें देशों से आग्रह किया गया है कि वे कोयले से बिजली बनाने को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयासों में तेजी लाएं. इससे पहले भारत और चीन ने कोयले के इस्तेमाल में कटौती का कड़ा विरोध किया था.
‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ से आशय उस प्रक्रिया से है जिसके तहत हम पता लगाते हैं कि वैश्विक स्तर पर देशों ने सामूहिक रूप से जलवायु कार्रवाई के मोर्चे पर कितनी प्रगति की है. समापन सत्र में संबोधन के बाद यादव ने ‘एक्स’ पर लिखा कि दुनिया दुबई में आयोजित सीओपी28 में एक साथ आई थी और यह एक हरित व स्वस्थ ग्रह के प्रति कार्य-उन्मुख दृष्टिकोण के लिए “सकारात्मक सहयोग और सौहार्द” को दर्शाता है.
उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अपनी जी20 अध्यक्षता के माध्यम से, भारत ने जलवायु कार्रवाई को एक सहयोगी प्रक्रिया बनाने का संकल्प प्रर्दिशत किया, जिसमें कोई पीछे न रहे. सीओपी28 में, भारत ने वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत में निहित उसी भावना को बढ़ावा दिया.ह्व उन्होंने कहा, ह्लहम राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार वैश्विक भलाई के लिए कार्रवाई करने को लेकर पेरिस समझौते में निहित मौलिक सिद्धांतों को दोहराते हुए सीओपी28 में हुए समझौते का समर्थन करते हैं.”
जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल बंद करने के लिए ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनी
सीओपी28 शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र में बुधवार को लगभग 200 देशों के बीच एक ऐतिहासिक जलवायु समझौते पर सहमति बनी, जिसमें जलवायु संकट के प्रमुख कारण जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल “उचित और न्यायसंगत” तरीके से खत्म करने का आ”ान किया गया है.
लगभग दो सप्ताह तक गहन बातचीत के बाद पहला ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ समझौता हुआ है, जिसमें देशों से आग्रह किया गया है कि वे कोयले से बिजली उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से घटाने के प्रयासों में तेजी लाएं. इससे पहले भारत और चीन ने कोयले के इस्तेमाल में कटौती का कड़ा विरोध किया था. सीओपी28 के अध्यक्ष सुल्तान अल-जाबिर ने समझौते को लेकर घोषणा की तो वार्ताकारों से भरा कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.
तड़के जारी किए गए दुबई जलवायु समझौते के मसौदे में पेरिस समझौते को ध्यान में रखते हुए तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के उद्देश्य से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में “गहरी, तीव्र और निरंतर” कटौती का आ”ान किया गया. ऐतिहासिक समझौते में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आठ सूत्री योजना पेश की गई है, जिसमें 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए, इस दशक में कार्रवाई में तेजी लाते हुए, ऊर्जा प्रणालियों में “उचित, व्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके” से “जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल में कमी” लाना शामिल है.
प्रस्ताव में, बिजली उत्पादन के लिए कोयले के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के प्रयासों में तेजी लाने का आग्रह किया गया है. हालांकि, पिछले सम्मेलनों के विपरीत, इसमें “नए और निर्बाध कोयला बिजली उत्पादन की अनुमति को सीमित करने” के संदर्भ का अभाव है. इस संदर्भ का अभाव भारत और चीन जैसे कोयले पर अत्यधिक निर्भर देशों की ओर से एक मजबूत प्रतिक्रिया का संकेत मिलता है.
साथ ही, 21 पन्नों के दस्तावेज. में तेल और गैस जैसे ईंधनों का कोई उल्लेख नहीं है, जिनका अमीर देश इस्तेमाल कर रहे हैं.
समझौते को मंजूरी दिए जाने के बाद सभा को संबोधित करते हुए, सुल्तान अल-जाबिर ने कहा कि यह एक मजबूत कार्य योजना है जिसमें तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के प्रयास किए गए हैं. उन्होंने कहा, “उत्सर्जन को काबू में रखने, अनुकूलन को लेकर अंतर को पाटने वैश्विक वित्त की कल्पना करने, और नुकसान और क्षति से बचाने के लिए यह एक संतुलित योजना है.”



