
नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अदालत में आवेदन देकर ‘न्यूजक्लिक’ पोर्टल के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में अपनी जांच पूरी करने के लिए और समय की मांग की. पुलिस चीन के पक्ष में प्रचार के लिए ‘न्यूजक्लिक’ को धन मिलने के आरोपों पर जांच कर रही है. आवेदन विशेष न्यायाधीश हरदीप कौर के समक्ष दायर किया गया, जिन्होंने मामले की सुनवाई 22 दिसंबर को तय की है.
आवेदन में यूएपीए सहित विशेष अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों के लिए कानून के तहत दी गई अधिकतम अवधि, यानी आरोपी की गिरफ्तारी के दिन से 180 दिन तक विस्तार की मांग की गई है. अदालत की अनुमति के बिना, जांच एजेंसी के पास जांच पूरी करने के लिए गिरफ्तारी के दिन से तीन महीने का समय होगा. कानून के मुताबिक, अगर कोई जांच एजेंसी तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने में विफल रहती है, तो हिरासत में मौजूद आरोपी को जमानत का वैधानिक अधिकार मिल जाता है.
आवेदन में दावा किया गया है कि मामले में दस्तावेज और अन्य सबूत बड़े पैमाने पर हैं और एजेंसी को जांच के तहत दिल्ली के बाहर कई स्थानों की यात्रा करनी है, जिसमें समय लगने की संभावना है. आवेदन में दावा किया गया कि मामले में कुछ व्यक्ति, संभावित गवाह हैं, जिनसे पूछताछ करने के लिए जांच एजेंसी को न्यायिक आदेश की आवश्यकता है.
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने तीन अक्टूबर को न्यूज पोर्टल के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ और मानव संसाधन विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था. वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. प्राथमिकी के मुताबिक, न्यूज पोर्टल को बड़ी मात्रा में चीन से धन ”भारत की संप्रभुता को प्रभावित करने” और देश के खिलाफ असंतोष पैदा करने के लिए आया था. प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया कि पुरकायस्थ ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए एक समूह-पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म (पीएडीएस) के साथ साजिश रची.
पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी में नामजद संदिग्धों और डेटा के विश्लेषण में सामने आए संदिग्धों के खिलाफ तीन अक्टूबर को दिल्ली में 88 और अन्य राज्यों में सात स्थानों पर छापे मारे गए थे. ‘न्यूजक्लिक’ के कार्यालयों और जिन पत्रकारों के आवासों की जांच की गई, वहां से लगभग 300 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए. छापेमारी के बाद विशेष प्रकोष्ठ ने नौ महिला पत्रकारों समेत 46 लोगों से पूछताछ की.



