निर्वाचन आयोग ने संजय मुखर्जी को बंगाल का डीजीपी नियुक्त किया, विवेक सहाय को एक दिन में हटाया

कोलकाता. निर्वाचन आयोग ने विवेक सहाय को पश्चिम बंगाल का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किए जाने के 24 घंटे के भीतर उन्हें मंगलवार को पद से हटा दिया और राज्य सरकार को उनके स्थान पर संजय मुखर्जी को नियुक्त करने का निर्देश दिया.
मुखर्जी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) काडर में सहाय से एक साल कनिष्ठ हैं. इस अप्रत्याशित कदम के बाद सहाय पश्चिम बंगाल में सबसे कम समय तक कार्यकाल में रहे डीजीपी बन गए.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी सहाय को वरिष्ठता क्रम के आधार पर नियुक्त किया गया था लेकिन वह लोकसभा चुनाव खत्म होने से पहले 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इसलिए निर्वाचन आयोग ने 1989 बैच के अधिकारी मुखर्जी को डीजीपी नियुक्त करने को कहा है. लोकसभा चुनाव चार जून को औपचारिक रूप से समाप्त होंगे.

राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के महानिदेशक अधिकारी मुखर्जी डीजीपी के पद के लिए निर्वाचन आयोग को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भेजी गयी तीन अधिकारियों की सूची में दूसरे स्थान पर थे. निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पहले राजीव कुमार को डीजीपी पद से हटाने का निर्देश दिया था. निर्वाचन आयोग ने राज्य को तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने और मंगलवार शाम पांच बजे तक नियुक्ति की पुष्टि करने का निर्देश दिया है. राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति के बारे में अचानक हुए बदलाव के बारे में बताते हुए निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सहाय की नियुक्ति केवल एक ”अंतरिम नियुक्ति” थी.

पोल पैनल के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि सहाय को उनकी वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर ही डीजीपी नामित किया गया था.
हालांकि, पश्चिम बंगाल काडर के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यदि किसी अधिकारी को आयोग, चुनाव के संचालन जैसे किसी विशेष कार्य की जिम्मेदारी देता है तो उसके पास उसका कार्यकाल बढ.ाने का अधिकार होता है. पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ”मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि सहाय को हटाने के लिए सेवानिवृत्ति ही एकमात्र आधार है.”

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