छत्तीसगढ़ में 2014 में हुए नक्सली हमले के मामले में चार माओवादियों को उम्रकैद की सजा

नयी दिल्ली. छत्तीसगढ़ में एक विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के चार सदस्यों को राज्य में 2014 में घात लगाकर किए गए हमले में शामिल रहने के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है. हमले में सीआरपीएफ के 11 जवान और चार पुलिसकर्मी समेत 16 लोग मारे गए थे.

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि जगदलपुर की अदालत ने राज्य के बस्तर और सुकमा जिलों के महादेव नाग, कवासी जोगा, दयाराम बघेल और मनीराम माड़िया को दोषी ठहराया. अधिकारी ने कहा कि वे भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेताओं की देखरेख और निर्देशों के तहत काम करने वाले एक ‘गैरकानूनी संघ’ के सदस्य थे. सुकमा जिले में मार्च 2014 में 100 सशस्त्र माओवादियों ने एक संयुक्त गश्ती दल पर घात लगाकर हमला कर दिया था, जिसमें सीआरपीएफ के 11 जवान, राज्य पुलिस के चार कर्मी और एक आम नागरिक मारे गए.

एनआईए के प्रवक्ता ने कहा, ”उन्होंने हमले की अगुवाई की, आईईडी विस्फोट किए और प्रतिबंधित संगठन के अन्य सदस्यों के साथ सुरक्षार्किमयों पर गोलीबारी की. हमलावरों ने सुरक्षार्किमयों को मार डाला और उनके हथियार लूट लिए.” अधिकारी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत तोंगपाल थाने में मामला दर्ज किया गया है. एनआईए ने 28 मार्च, 2014 को मामला दोबारा दर्ज करने के बाद जांच अपने हाथ में ली थी. एजेंसी ने 18 अगस्त, 2015 को 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था.

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