सरकारी बंगला आवंटन विवाद: निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय पहुंचे राघव चड्ढा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 10 Oct 2023 08:56 PM
सरकारी बंगला आवंटन विवाद: निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय पहुंचे राघव चड्ढा
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नयी दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने उन्हें आवंटित सरकारी बंगले को खाली कराने से राज्यसभा सचिवालय को रोकने वाले एक अंतरिम आदेश को रद्द करने के एक निचली अदालत के फैसले को मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी. मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए याचिका आई. पीठ ने बुधवार को इसे सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई.

चड्ढा की वकील ने अदालत को बताया कि सांसद को नोटिस जारी किया गया है और बंगला खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें बंगले के आवंटन को रद्द करने पर निचली अदालत ने रोक लगा दी थी जिसे अब हटा लिया गया है.
निचली अदालत ने पांच अक्टूबर के एक आदेश में कहा था कि चड्ढा यह दावा नहीं कर सकते कि उन्हें आवंटन रद्द होने के बाद भी राज्यसभा सांसद के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान सरकारी बंगला रखने का अधिकार है.

निचली अदालत ने 18 अप्रैल को पारित एक अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की थी, जिसमें राज्यसभा सचिवालय को चड्ढा से सरकारी बंगला खाली नहीं कराने का निर्देश दिया गया था. निचली अदालत ने कहा था कि चड्ढा को उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना अंतरिम राहत दी गई थी.

निचली अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया था कि सांसद के रूप में आवास के आवंटन को सदस्य के पूरे कार्यकाल के दौरान किसी भी परिस्थिति में निरस्त नहीं किया जा सकता. चड्ढा को पिछले साल छह जुलाई को पंडारा पार्क में ‘टाइप 6’ बंगला आवंटित किया गया था लेकिन उन्होंने 29 अगस्त को राज्यसभा के सभापति को ज्ञापन सौंपकर ‘टाइप 7’ बंगला आवंटित करने का अनुरोध किया था. इसके बाद उन्हें पंडारा रोड पर एक अन्य बंगला आवंटित कर दिया गया.

हालांकि, इस साल मार्च में आवंटन रद्द कर दिया गया. अप्रैल, 2022 में राज्यसभा सदस्यों के लिए जारी ‘हैंडबुक’ के अनुसार पहली बार के सांसद होने के नाते चड्ढा को सामान्य तौर पर ‘टाइप-5’ का बंगला आवंटित किया जा सकता है. इसके अनुसार, केंद्रीय मंत्री रह चुके सांसदों, पूर्व राज्यपालों या पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व लोकसभा अध्यक्षों को ‘टाइप-7’ बंगलों में रहने का अधिकार है.

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