क्या टूट गया ईरान-अमेरिका समझौता? ट्रंप को आया गुस्सा, कहा- तेहरान के साथ वार्ता समय की बर्बादी

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Wed, 08 Jul 2026 03:26 PM
क्या टूट गया ईरान-अमेरिका समझौता? ट्रंप को आया गुस्सा, कहा- तेहरान के साथ वार्ता समय की बर्बादी
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अमेरिका: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने के लिए बना अंतरिम समझौता अब टूटने की कगार पर दिखाई दे रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि उनके लिए यह समझौता अब खत्म हो चुका है और तेहरान के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है। ट्रंप इस समय तुर्किये में नाटो समिट में हिस्सा ले रहे हैं। दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है। ऐसे में इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और नए संघर्ष की आशंका गहरा गई है।

अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए। इन हमलों का निशाना बंदर अब्बास, सीरिक और केश्म द्वीप के सैन्य ठिकाने रहे। वॉशिंगटन का कहना है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। इसी के साथ अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री से जुड़ी छूट भी वापस ले ली। इसके बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत की दिशा में जवाबी हमले किए, जिससे पहले से लागू युद्धविराम और बातचीत की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

ट्रंप को क्यों लगा कि बातचीत का कोई फायदा नहीं है?
ट्रंप ने कहा कि उनके हिसाब से अब ईरान के साथ समझौता खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि वह अब तेहरान से कोई बातचीत नहीं करना चाहते, क्योंकि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारी चाहें तो बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उससे कोई नतीजा निकलेगा। ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि अगर उसके पास परमाणु हथियार हुए तो वह उनका इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि अब इस मुद्दे पर उनका धैर्य समाप्त हो चुका है।

अमेरिका ने इतने बड़े हमले क्यों किए?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हालिया हवाई हमले पहले की तुलना में चार से पांच गुना अधिक बड़े और ताकतवर थे।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई।
वॉशिंगटन का दावा है कि इन जहाजों पर हमलों के पीछे ईरान की भूमिका थी।
इसी वजह से अमेरिका ने इस बार बंदर अब्बास, सीरिक और केश्म द्वीप के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर व्यापक सैन्य कार्रवाई की।
यह हमला ऐसे समय हुआ, जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा था।
माना जा रहा था कि अंतिम संस्कार के दौरान तनाव कम रहेगा, लेकिन अमेरिकी हमलों से हालात फिर बिगड़ गए।
इन घटनाओं के बाद ईरान-अमेरिका के बीच अंतिम समझौते और आगे की वार्ता पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी?
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरानी संसद के अध्यक्ष और अमेरिका के साथ वार्ता से जुड़े प्रमुख नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अंतरिम समझौते की कई शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के समुद्री प्रबंधन में दखल, दोबारा तेल प्रतिबंध लागू करना और दक्षिणी ईरान पर हमले करना समझौते की भावना के खिलाफ है। ईरान की सेना ने भी अमेरिकी कार्रवाई को खुला हमला बताते हुए कहा कि इसका करारा जवाब दिया जाएगा। सेना ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का रास्ता वही होगा, जिसे ईरान तय करेगा और किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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