आईएईए महानिदेशक ने की मोदी से मुलाकात, जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में भारत की सराहना की

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी के साथ मुलाकात में शांति और विकास के लिए परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि ग्रॉसी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में भारत के बेमिसाल रिकॉर्ड की सराहना की तथा साथ ही परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में देश की प्रगति की प्रशंसा की. पीएमओ के मुताबिक, उन्होंने विशेष रूप से स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के विकास और तैनाती को रेखांकित किया.

बैठक में मोदी ने ऊर्जा मिश्रण के तहत पर्यावरण अनुकूल परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता की हिस्सेदारी बढ.ाने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को साझा किया. बयान में कहा गया है कि ग्रॉसी ने समाज के हित में असैन्य परमाणु अनुप्रयोगों में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना की. इसमें स्वास्थ्य, भोजन, जल शोधन, प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सहित मानवता के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में भारत द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति शामिल है.

बयान में कहा गया है कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और सूक्ष्म रिएक्टरों सहित ‘नेट जीरो’ प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका का विस्तार करने पर उनके बीच विचारों का आदान-प्रदान किया गया. ग्रॉसी ने आईएईए और भारत के बीच उत्कृष्ट साझेदारी की प्रशंसा की. उन्होंने कई देशों की मदद करने वाले भारत के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सराहना की. बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष ‘ग्लोबल साउथ’ में असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के विस्तार के लिए भारत और आईएईए के बीच सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए. इस बीच, आईएईए के महानिदेशक ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की.

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”मेरे मित्र आईएईए के महानिदेशक राफेल एम ग्रॉसी से आज मिलकर अच्छा लगा. उनकी फिर से नियुक्ति पर उन्हें बधाई दी. परमाणु ऊर्जा के विकासात्मक महत्व पर चर्चा की. परमाणु अप्रसार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. भारत हमेशा आईएईए का एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार रहेगा.”

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