अब दुनिया भर के बड़े खेल आयोजनों में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है भारत: राजनाथ

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 13 Apr 2026 03:16 PM
अब दुनिया भर के बड़े खेल आयोजनों में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है भारत: राजनाथ
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लखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि पहले सिर्फ क्रिकेट और हॉकी खेलने वाले देश के तौर पहचाना जाने वाला भारत अब दुनिया भर के बड़े खेल आयोजनों में भी अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। सिंह ने सोमवार को लखनऊ में ‘सांसद खेल महाकुंभ-2026’ के उद्घाटन अवसर पर कहा, “पहले, हमारी पहचान सिर्फ क्रिकेट और हॉकी खेलने वाले देश के तौर पर थी और जब ओलंपिक खेलों की बात आती थी, तो हम अक्सर पदक तालिका में अपना नाम भी दर्ज नहीं करा पाते थे। हालांकि, भारत अब दुनिया भर के बड़े खेल आयोजनों में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पहले खेलों को कभी भी वह अहमियत नहीं मिली जिसके वे हकदार हैं, इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि समाज में खेलों और एथलीटों के महत्व को सिर्फ समझा ही न जाए, बल्कि उन्हें बेहतर करने का हर मौका भी दिया जाए। ंिसह ने यह भी कहा कि पिछले 10-12 सालों में भारत में खेलों के स्तर और उपलब्धियां देखकर महसूस किया जा सकता है कि पूरे माहौल में बड़ा बदलाव आया है।

सिंह ने पूर्ववर्ती सरकारों पर खेलों के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए कहा, “एक समय था जब हमारे देश में खेलों को लेकर उदासीनता की भावना थी। बहुत कम लोग खेलों को करियर के तौर पर अपनाने के बारे में सोचते भी थे। न तो खेलों की मूलभूत सुविधाओं और न ही एथलीटों की खास जरूरतों पर ठीक से ध्यान दिया जाता था।”

उन्होंने कहा यहां तक कि जो लोग खेलना चाहते थे उनके लिए भी छोटे शहरों में मौजूद सुविधाओं का स्तर बहुत निम्न था, नतीजतन कई एथलीटों की प्रतिभा इन र्किमयों की वजह से दम तोड़ देती थी। लखनऊ लोकसभा सीट से सांसद ंिसह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आज खेलों और एथलीटों से जुड़ी समस्याओं को सक्रिय रूप से हल कर रही है।

सिंह ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, खेलों को एक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। देश के पहले राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना से इसमें और मदद मिलेगी। रक्षा मंत्री ने कहा, ”पिछले 11 वर्षों में, भारत में खेलों का एक नया दौर शुरू हुआ है। यह नया दौर केवल वैश्विक मंच पर भारत को एक प्रमुख खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने के बारे में नहीं है। बल्कि, यह खेलों के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण के एक नए चरण का प्रतीक है।”

‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम का ज़क्रि करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम ने हमारी बेटियों की भागीदारी के संबंध में एक और उत्साहजनक परिणाम दिया है। उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ महिला लीग देश के कई शहरों में आयोजित की जा रही है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बहुत ज्Þयादा है।

उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ ने भारत के पारंपरिक खेलों की प्रतिष्ठा को भी बहाल किया है, जिनमें गतका (मुख्य रूप से सिखों से जुड़ी मार्शल आर्ट का एक रूप), मल्लखंभ, थांग-ता (एक प्राचीन मणिपुरी मार्शल आर्ट), कलरिपयट्टू (केरल से उत्पन्न एक मार्शल आर्ट विधा), और योगासन को प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्तियां प्रदान कर रही है।

सिंह ने कहा कि वर्तमान में गांवों के अंदर और उनके आस-पास भी आधुनिक खेल बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है और इसके तहत देश के सबसे दूरदराज के कोनों में भी अब बेहतर मैदान, आधुनिक स्टेडियम और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ अभियान के तहत सरकार ने खेल बुनियादी ढांचे के विकास पर पहले ही लगभग पांच हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिये हैं, नतीजतन इस बढ़ते खेल बुनियादी ढाँचे की बदौलत अब ज्Þयादा संख्या में एथलीटों के लिए खेलों में शामिल होना आसान हो गया है। ंिसह ने कहा कि लखनऊ हमेशा से अपनी समृद्ध खेल संस्कृति के लिए विख्यात रहा है। उन्होंने कहा कि ‘संसद खेल महाकुंभ’ का आयोजन इस खेल संस्कृति को और अधिक विकसित करने के विशेष उद्देश्य के साथ किया गया है।

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