भारत-ओमान व्यापार समझौता तीन महीने के भीतर लागू होने की संभावना है: गोयल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 19 Dec 2025 08:19 PM
भारत-ओमान व्यापार समझौता तीन महीने के भीतर लागू होने की संभावना है: गोयल
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नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और ओमान मुक्त व्यापार समझौते को अगले तीन महीनों के भीतर लागू करने की कोशिश करेंगे. दोनों देशों के बीच 18 दिसंबर को मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए. व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत, ओमान ने अपनी 98 से अधिक शुल्क श्रेणियों या उत्पाद श्रेणियों पर शून्य शुल्क की पेशकश की है. इससे भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान की जाएगी.

रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, औषधि, चिकित्सकीय उपकरण और मोटर वाहन सहित सभी प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पूर्ण रूप से शुल्क मुक्त कर दिया गया है. वर्तमान में ओमान में इन वस्तुओं पर पांच से 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है. दूसरी ओर, भारत अपनी कुल शुल्क श्रेणियों (12,556) में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश कर रहा है. यह मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के आयात का 94.81 प्रतिशत हिस्सा है.

ओमान ने आखिरी बार कोई व्यापार समझौता अमेरिका के साथ किया था. ओमान-अमेरिका व्यापार समझौते को 2006 में अंतिम रूप दिया गया था, हालांकि इसे लागू जनवरी 2009 में किया गया. गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ” ओमान के मंत्री और मैंने इस बात पर चर्चा की है कि हम इस समझौते को तीन महीने के भीतर लागू करने की कोशिश करेंगे.” भारतीय व्यवसायों के लिए ओमान में निवेश के संभावित क्षेत्रों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस्पात, ऊर्जा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं.

मंत्री ने कहा, ” जिन परियोजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है, उनमें भारतीय कंपनियां निवेश करना पसंद करेंगी. हरित इस्पात उत्पादन के लिए इस्पात क्षेत्र में बड़ा निवेश किया जा रहा है.” उन्होंने कहा कि ओमान सहयोग करने को काफी उत्साहित है क्योंकि भारत के पास विशाल भूमि भंडार है. गोयल ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाशे जा सकते हैं. ऊर्जा को हरित हाइड्रोजन या हरित अमोनिया में परिर्वितत करके दुनिया के बाकी हिस्सों में निर्यात किया जा सकता है. इससे भारतीयों को निर्यात का अवसर मिलेगा एवं भारतीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे.

मंत्री ने कहा, ” ओमान में बड़ी मात्रा में संगमरमर के प्रसंस्करण की अपार संभावनाएं हैं…. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा में भारी निवेश की संभावनाएं हैं…. कुछ लोग ओमान में बैटरी विनिर्माण पर भी विचार कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि ओमान की कंपनियां भी भारतीय व्यवसायों के साथ सहयोग करने को लेकर बहुत उत्साहित हैं. गोयल ने कहा, ”पहले ही ओमान की एक दुग्ध कंपनी ने अमूल के साथ संयुक्त उद्यम शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है.” उन्होंने यह भी बताया कि ओमान की कंपनियों और ‘सॉवरेन वेल्थ फंड’ को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया गया है.

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