
अबू धाबी/दुबई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खाड़ी क्षेत्र की यात्रा के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बावजूद महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को जल्द मूर्त रूप देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बुधवार को कहा कि पिछले सितंबर में नयी दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित आईएमईसी का मुद्दा मंगलवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ मोदी की बातचीत के दौरान चर्चा में आया. यह आर्थिक गलियारा भारत, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल और यूरोप को जोड़ेगा. इसे चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ (बीआरआई) परियोजना के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.
क्वात्रा ने मोदी की यूएई यात्रा के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि आईएमईसी के सशक्तिकरण और संचालन के लिए सहयोग से संबंधित अंतर-सरकारी ढांचागत समझौता क्षेत्रीय संपर्क बढ.ाने का काम करेगा. उन्होंने कहा, “समझौते का एक उद्देश्य यह है कि आईएमईसी कितनी तेजी से संचालित होता है और इसमें शामिल पक्षों के बीच मजबूत तथा अधिक व्यापक क्षेत्रीय संपर्क के मूल उद्देश्य को कितना फायदा होता है.” इसके साथ ही क्वात्रा ने कहा कि गाजा में संघर्ष और लाल सागर की स्थिति को लेकर क्षेत्र में जारी अशांति चिंता का विषय है.
ह्लदोनों देश और उनके नेता हालात पर निगरानी और पर्यवेक्षण के साथ विचारों का आदान-प्रदान जारी रखे हुए हैं. लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है कि आर्थिक सहयोग को आगे बढ.ाया जाए और रफ्तार को कायम रखा जाए.ह्व क्वात्रा ने कहा कि आईएमईसी पर समझौते का मुख्य क्षेत्र लॉजिस्टिक मंचों पर सहयोग से संबंधित है.
उन्होंने कहा, “हमारी आपूर्ति श्रृंखला सेवाएं केवल एक या दो चीजों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी तरह के सामान्य माल, थोक कंटेनर और तरल पदार्थों को शामिल करती हैं.” इसके साथ ही यूएई के निवेश मंत्रालय और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. विदेश सचिव ने कहा, ह्लयह समझौते की रूपरेखा है जो डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश सहयोग पर केंद्रित है. सरकारी एजेंसियां और नियामक प्राधिकरण भी इस विशेष डिजिटल बुनियादी ढांचे समझौते के तहत साझेदारी करने पर विचार करेंगे.”
मोदी ने यूएई के प्रधानमंत्री, मेडागास्कर के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अपने समकक्ष शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मखतूम से मुलाकात की और व्यापार तथा निवेश समेत द्विपक्षीय सहयोग के अनेक क्षेत्रों पर चर्चा की. उन्होंने द्विपक्षीय निवेश संधि होने और बढ़ते आर्थिक संबंधों का भी स्वागत किया. प्रधानमंत्री ने यूएई के उपराष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद को भारत आने का न्योता भी दिया.
मोदी ने बैठक की तस्वीरों के साथ ‘एक्स’ पर लिखा, ”प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद से मिलना हमेशा सुखद रहा है. दुबई के विकास के लिए उनका दृष्टिकोण पूरी दुनिया के सामने है. हमारी बातचीत में वाणिज्य से लेकर संपर्क और दोनों देशों की जनता के बीच संबंध मजबूत करने के तरीके जैसे व्यापक विषय शामिल रहे.”
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में कहा गया, ”भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुबई में यूएई के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद से मुलाकात की. चर्चा में व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और लोगों से लोगों के संबंधों सहित द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक क्षेत्रों पर चर्चा हुई.”
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मोदी और यूएई के रक्षा मंत्री का प्रभार भी संभाल रहे एवं दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद ने द्विपक्षीय निवेश संधि पर दस्तखत होने का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों पर संतोष प्रकट किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूएई ने समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते की अहम भूमिका को भी स्वीकार किया.
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि के बारे में जानकारी देते हुए, विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि यह समझौता मजबूत और अधिक व्यापक एवं समग्र निवेश साझेदारी के लिए आधार तैयार करेगा क्योंकि यह सिर्फ मौजूदा निवेश की सुरक्षा पर केंद्रित नहीं है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के प्रति यूएई के प्रधानमंत्री की सदाशयता के लिए उनका आभार जताया.
मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, सेवा और पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में दुबई के विकास में भारतीय मूल के लोगों के योगदान को रेखांकित किया. बयान में कहा गया, ”प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई में भारतीय समुदाय के एक अस्पताल के लिए भूमि देने पर प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद की अत्यधिक प्रशंसा की. इस अस्पताल में भारतीय कामगारों को किफायती स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा.” इस बीच, मेडागास्कर के राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना के साथ एक अन्य बैठक में, मोदी ने भारत-मेडागास्कर साझेदारी को और मजबूत करने तथा द्वीपीय राष्ट्र की विकासात्मक यात्रा में मदद करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई.
मोदी और राजोएलिना ने यहां विश्व सरकार शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की जो दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों और प्राचीन भौगोलिक संबंधों को मान्यता दी. उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की और संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की सराहना की.”
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-मेडागास्कर साझेदारी को और मजबूत करने तथा ‘सागर’ दृष्टिकोण (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक साथी विकासशील देश के रूप में भारत, मेडागास्कर की विकास यात्रा में प्रतिबद्ध भागीदार बना रहेगा. सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने उन विषयों के बारे में विस्तार से बात की जिन्होंने पृथ्वी को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श को मजबूती प्रदान की है और वैश्विक शासकीय संस्थाओं में सुधारों पर जोर दिया है.
यूएई के साथ कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने और ‘अहलन मोदी’ कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, जिसमें भारतीय प्रवासियों की भारी भागीदारी देखी गई, प्रधानमंत्री मोदी आज अबू धाबी में सबसे बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन करने वाले हैं. इसके बाद वह दोहा के लिए रवाना होंगे जहां वह कतर की अपनी दो दिवसीय यात्रा के तहत वहां के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे.
मोदी ने दुबई में रखी ‘भारत मार्ट’ की आधारशिला, भारतीय एमएसएमई के लिए बनेगा मंच
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने बुधवार को ‘भारत मार्ट’ की आधारशिला रखी जो भारतीय एमएसएमई क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच का एक प्रभावी मंच मुहैया कराएगा. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मोदी और मकतूम ने दुबई के जेबेल अली मुक्त व्यापार क्षेत्र में बनाए जाने वाले ‘भारत मार्ट’ के शिलान्यास से संबंधित कार्यक्रम में ऑनलाइन शिरकत की. इसका निर्माण डीपी वर्ल्ड करेगी.
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह मार्ट भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को खाड़ी, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाने का एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा और उनके निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
बयान के मुताबिक, “दोनों नेताओं ने विश्वास जताया कि ‘भारत मार्ट’ जेबेल अली बंदरगाह की रणनीतिक स्थिति और लॉजिस्टिक में इसकी मजबूती का लाभ उठाकर भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार को और आगे बढ़ाएगा.” इससे पहले मोदी ने विश्व सरकार शिखर सम्मेलन को संबोधित किया और कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं.
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में भारतीय तिरंगे के रंगों से जगमगा उठा बुर्ज खलीफा
दुबई का प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा उस समय भारतीय तिरंगे के रंगों से जगमगा उठा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति ने यहां इस वर्ष के विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में एक द्विपक्षीय बैठक की. इस सम्मेलन में भारत सम्मानित अतिथि के रूप में सम्मिलित हो रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया और दोनों देशों ने ऊर्जा, बुनियादी संरचनाओं और निवेश जैसे मुख्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किये.
प्रधानमंत्री मोदी के 2024 विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में मुख्य संबोधन से पहले मंगलवार को बुर्ज खलीफा ‘सम्मानित अतिथि भारत’ के शब्दों से जगमगा उठा था.
प्रधानमंत्री मोदी का ‘गर्मजोशी’ से स्वागत करते हुए दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर बुर्ज खलीफा की दो तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें से एक में इमारत भारतीय तिरंगे के रंगों और दूसरे में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन के लोगो से जगमगाती हुई दिखाई दे रही है.
पोस्ट में लिखा था, ”हम इस वर्ष के विश्व सरकार शिखर सम्मेलन के सम्मानित अतिथि, भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक स्वागत करते हैं. हमारे देशों के बीच मजबूत संबंध अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मॉडल के रूप में काम करते हैं.”



