भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर: सीतारमण

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 04 Nov 2025 08:09 PM
भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर: सीतारमण
ऑडियो सुनें

नयी दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारत वैश्विक मंच पर आज एक तीव्र गति से ब­ढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है और शीघ्र ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. सीतारमण ने यहां दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज अपनी आर्थिक ताकत के दम पर अपने पैरों पर खड़ा है.

उन्होंने कहा, ” हमें जो सबसे अलग बनाता है, वह 2014 में 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से अब पांचवीं और फिर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है. संभवत? जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने वाले हैं.” उन्होंने कहा कि सरकार अब तक 2.5 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी की स्थिति से बाहर निकालने में सफल रही है. इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन-स्तर जैसे कई मानदंड शामिल होते हैं.

वित्त मंत्री ने बैंकों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बही-खाते सात-आठ साल पहले की ‘दोहरी बही-खाता समस्या’ की तुलना में काफी मजबूत हो चुके हैं. दोहरी बही-खाता समस्या का मतलब बैंकों और उद्योगों दोनों पर भारी वित्तीय दबाव होने से है. इसमें जहां अधिक कर्ज के कारण कंपनियां ऋण चुकाने में चूक करती हैं, वहीं इससे बैंकों का एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) ब­ढ़ती है.

इसके साथ ही सीतारमण ने भरोसा जताया कि सरकार चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहेगी. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है.

सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करेगी: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को भरोसा जताया कि सरकार मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लेगी. वित्त मंत्री ने फरवरी में संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में 2025-26 में राजकोषीय घाटा 15.69 लाख करोड़ रुपये यानी सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जबकि 2024-25 में यह 4.8 प्रतिशत था.

सीतारमण ने यहां दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स (डीएसई) में हीरक जयंती समापन समारोह को संबोधित करने के बाद छात्रों से बातचीत में यह बात कही. उन्होंने कहा, ”ईश्वर की इच्छा और प्रधानमंत्री से मिले हर समर्थन के साथ, हम राजकोषीय घाटे के उस लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम होंगे…. यह संसद में जतायी गयी प्रतिबद्धता है और इसका पालन करना मेरा कर्तव्य है.” महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के अंत में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 36.5 प्रतिशत रहा. वित्त मंत्री वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट फरवरी में पेश करेंगी. सीतारमण ने कहा कि अब से सरकार का ध्यान ऋण-जीडीपी अनुपात पर रहेगा.

उन्होंने कहा, ”… यह हमारे लिए और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है. हमें सतर्कता के साथ सुधारों और सूझबूझ वाले राजकोषीय प्रबंधन के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है. यह प्रत्येक वित्त मंत्री की जिम्मेदारी है.” वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में केंद्र सरकार का ऋण सकल घरेलू उत्पाद का 56.1 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो 2024-25 के संशोधित अनुमान में सकल घरेलू उत्पाद के 57.1 प्रतिशत से कम है.

संशोधित राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के अनुसार, सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से कम करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि नागरिकों को खुद पर और देश की अर्थव्यवस्था पर विश्वास करना चाहिए. उन्होंने कहा, ”हमें उन लोगों के बहकावे में नहीं आना चाहिए जो कहते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है. 140 करोड़ लोगों के देश को कौन बता सकता है कि हमारी अर्थव्यवस्था मृतप्राय है? बाहर के लोगों का हम पर ताना मारना ठीक है, लेकिन देश के लोगों को अपने लोगों के प्रयासों और उपलब्धियों की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए.”

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu