यह संदेहास्पद है कि प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रधानमंत्री ने 11 दिन का उपवास रखा: मोइली

बेंगलुरु. कांग्रेस की कर्नाटक इकाई ने अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से संबंधित समारोह को ”राजनीतिक कार्यक्रम” करार दिया और कहा कि यह संदेहास्पद है कि समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 दिन का उपवास रखा होगा. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में नवनिर्मित अयोध्या मंदिर में ”भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राम” की नहीं बल्कि महात्मा गांधी के राम की पूजा की.

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा की तरह तीन करोड़ तीर्थयात्रियों को अयोध्या भेजने की उनकी भी कोई योजना है, सिद्धरमैया ने कहा कि क्या कर्नाटक के मंदिरों में राम नहीं हैं? उन्होंने कहा, ”क्या कर्नाटक के गांवों में राम मंदिर सच्चे राम मंदिर नहीं हैं? क्या वहां की मूर्तियां श्रीरामचंद्र, सीता, लक्ष्मण और अंजनेय की नहीं हैं? भाजपा अयोध्या में राम मंदिर को लेकर राजनीति करना चाहती है. हम उनकी इस राजनीति के खिलाफ हैं.”

मुख्यमंत्री ने कहा, ”हम महात्मा गांधी के राम, रामायण के राम और दशरथ के पुत्र श्री रामचंद्र से प्यार करते हैं और उनका सम्मान तथा पूजा करते हैं, भाजपा के राम से नहीं.” पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली ने इस दावे पर संदेह जताया कि राम मंदिर में प्रतिष्ठा समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 दिन का उपवास रखा था.

उन्होंने चिक्कबल्लापुर में मीडिया से कहा, ”आज सुबह की सैर के दौरान मेरे साथ चल रहे एक चिकित्सक ने कहा कि किसी के लिए भी भोजन के बिना 11 दिन तक जीवित रहना संभव नहीं है. अगर कोई बच गया तो यह चमत्कार है. इसलिए, यह संदिग्ध है कि उन्होंने (मोदी) उपवास रखा था.” पूर्व केंद्रीय मंत्री मोइली ने कहा, ”अगर उन्होंने (मोदी) बिना व्रत रखे मंदिर के गर्भगृह में पूजा की होगी तो वह स्थान अशुद्ध हो जाएगा और वहां (अलौकिक) शक्ति उत्पन्न नहीं होगी. वह (मोदी) कहते हैं कि उन्होंने 11 दिन तक उपवास रखा है और केवल नारियल पानी पीकर जीवित रहे. उनके चेहरे पर थकान का कोई निशान नहीं था. मैं नहीं बल्कि लोग सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने व्रत रखा था या नहीं.”

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