जन्माष्टमी 2026: आज रात इस समय करें कान्हा की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, चांद निकलने का समय और भोग

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Fri, 04 Sep 2026 08:38 AM
जन्माष्टमी 2026: आज रात इस समय करें कान्हा की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, चांद निकलने का समय और भोग
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व इस वर्ष 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की पूजा में रात के समय का विशेष महत्व माना जाता है।

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ समय

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। 4 सितंबर को निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भक्त बाल गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार और पूजा कर सकते हैं।

प्रमुख समय:

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
  • निशीथ काल: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक
  • मुख्य कृष्ण पूजा: मध्यरात्रि 12 बजे के आसपास

जन्माष्टमी पर बन रहे हैं कई शुभ योग

इस वर्ष जन्माष्टमी को कई शुभ संयोगों से जुड़ा बताया गया है। इस दिन जयंती योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, हंस योग, मालव्य योग, बुधादित्य राजयोग और नवपंचम राजयोग का संयोग बताया गया है।

इसके अलावा अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति भी इस पर्व को विशेष बनाती है। धार्मिक मान्यताओं में ऐसे अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना को शुभ माना जाता है।

जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा कैसे करें?

जन्माष्टमी की पूजा के लिए सबसे पहले घर के पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद लड्डू गोपाल को स्नान कराकर उनका सुंदर श्रृंगार करें।

पूजा की आसान विधि:

  1. पूजा स्थल को साफ करके भगवान श्रीकृष्ण के लिए आसन तैयार करें।
  2. लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें।
  3. इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं।
  4. भगवान को नए वस्त्र पहनाएं।
  5. मोर मुकुट, बांसुरी और फूलों से उनका श्रृंगार करें।
  6. लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान कर झूला झुलाएं।
  7. माखन-मिश्री, फल, पंजीरी और मिठाई का भोग लगाएं।
  8. धूप और दीप जलाकर श्रीकृष्ण की आरती करें।
  9. मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाने के बाद प्रसाद ग्रहण करें।

कान्हा को भोग में क्या चढ़ाएं?

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को उनकी प्रिय मानी जाने वाली चीजों का भोग लगाने की परंपरा है। माखन-मिश्री को विशेष रूप से भगवान कृष्ण से जोड़ा जाता है।

भोग में धनिया पंजीरी, माखन-मिश्री, दूध से बने पकवान, फल और मिठाइयां शामिल की जा सकती हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भोग तैयार कर सकते हैं।

यदि घर में व्रत रखा गया है, तो व्रत के नियमों के अनुसार फलाहार और अन्य उपयुक्त प्रसाद तैयार किया जा सकता है।

जन्माष्टमी पर कब दिखाई देगा चांद?

4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा रात करीब 11 बजकर 24 मिनट पर दिखाई देने की संभावना बताई गई है। हालांकि चंद्रोदय का वास्तविक दृश्य स्थानीय स्थान और मौसम की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

जन्माष्टमी पर रखें इन बातों का ध्यान

जन्माष्टमी के दिन पूजा स्थल और पूजा सामग्री की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। भगवान को सात्विक भोजन का भोग लगाएं और श्रद्धा के साथ पूजा करें। लड्डू गोपाल के श्रृंगार में मोर मुकुट और बांसुरी जैसी चीजें शामिल करना भक्तों के बीच प्रचलित परंपरा है।

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाकर आरती करें और इसके बाद अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक और ज्योतिष संबंधी जानकारी सामान्य मान्यताओं, पंचांग तथा धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार पूजा एवं चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है।

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