मांडविया ने केजरीवाल पर साधा निशाना, दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं करने पर उठाए सवाल

नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता व्यक्त करने के लिए बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर उन्हें इतनी फिक्र होती तो वह आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करते.

मांडविया ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) को लागू नहीं करने के लिए भी केजरीवाल की आलोचना की. पीएम-एबीएचआईएम सभी स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल सुविधा को बनाए रखने में स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है.

मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत से केजरीवाल ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया कि सभी सरकारी अस्पतालों और मोहल्ला क्लीनिक में लोगों के लिए दवाएं और जांच सुविधाएं उपलब्ध हों. पीएम-एबीएचआईएम योजना के तहत, दिल्ली को 1,139 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 11 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और नौ महत्वपूर्ण देखभाल सुविधा ब्लॉक के लिए 2406.77 करोड़ रुपये आवंटित किए गए.

मांडविया ने कहा, ”योजना के तहत उपलब्ध वित्तीय सहायता का लाभ उठाने के लिए दिल्ली सरकार से कई बार सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया गया, लेकिन वह अभी तक आगे नहीं आई है. अगर आप वाकई दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं तो इस एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिल्ली के लोगों के लिए 2,406.77 करोड़ रुपये प्राप्त करें.” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) लागू नहीं की है, जिसके कारण राष्ट्रीय राजधानी के लगभग 30 लाख लोग उस योजना के लाभ से वंचित हैं जो माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए परिवार को प्रति व्यक्ति पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है.”

मांडविया ने कहा, ”केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के कुल 6,54,041 परिवार (लगभग 30 लाख व्यक्ति) आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के लिए पात्र हैं. अगर दिल्ली में एबी पीएम-जेएवाई लागू होती तो राष्ट्रीय राजधानी को योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रति वर्ष 47 करोड़ रुपये मिलते.” उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस योजना के तहत अस्पतालों के शामिल नहीं होने के कारण दूसरे राज्यों से यहां काम करने के लिए आने वालों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”दिल्ली में देश भर से लोग आते हैं. वे आम तौर पर एबी पीएमजेएवाई के लाभार्थी हैं. इस आबादी की स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, भारत सरकार ने 92 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया है. हालांकि, दिल्ली सरकार के अस्पतालों को योजना के तहत सूचीबद्ध नहीं किया गया है.”

मांडविया ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में दिल्ली में अस्पताल के बिस्तरों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि आधे से अधिक बिस्तर केंद्र सरकार के चार अस्पतालों-अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थान (एम्स), राम मनोहर लोहिया (आरएमएल), सफदरजंग और लेडी हार्डिंग में हैं. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों और सीटों में भी बढ.ोतरी नहीं की गई है.

मांडविया ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में तपेदिक (टीबी) के मामले बढ.ते जा रहे हैं और बीमारी से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली अन्य केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना में टीकाकरण में भी पीछे है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को कहा था कि केजरीवाल के ताजा निर्देश बताते हैं कि हिरासत में होने के बावजूद वह हमेशा दिल्ली के लोगों की भलाई के बारे में सोचते हैं.

Related Articles

Back to top button