CAA जल्द लागू न हुआ तो मतुआ समुदाय भाजपा पर भरोसा करना छोड़ देगा : सामुदायिक नेता

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 04 Nov 2022 07:13 PM
CAA जल्द लागू न हुआ तो मतुआ समुदाय भाजपा पर भरोसा करना छोड़ देगा : सामुदायिक नेता
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कोलकाता. केंद्र द्वारा पड़ोसी देश से आए और गुजरात में बसे लोगों के एक वर्ग को नागरिकता देने का फैसला करने के कुछ दिनों बाद, बंगाल में मतुआ समुदाय के सदस्यों ने कहा कि अगर उन्हें समान लाभ प्रदान नहीं किया गया तो वे ‘‘भाजपा पर भरोसा करना बंद कर देंगे’’. समुदाय के नेताओं ने कहा कि अगर नागरिकता की उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरेंगे.

अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के वरिष्ठ नेता मुकुट मणि अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि हमें भी जल्द ही नागरिकता दी जाएगी, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो मतुआ लोग विरोध स्वरूप सड़क पर उतरेंगे.’’ राज्य की अनुसूचित जाति की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मतुआ धार्मिक उत्पीड़न के कारण 1950 के दशक से बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में पलायन कर रहे थे.

मार्च 1971 तक आने वाले सभी लोग 1955 के नागरिकता अधिनियम के अनुसार भारत के कानूनी नागरिक हैं. अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, 1971 के बाद आने वालों को सात साल के प्रवास के बाद नागरिक बनाने के लिए आवेदन करना होता है.
केंद्र ने हाल ही में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान छोड़कर आए उन हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने का फैसला किया, जिन्हें गुजरात के दो जिलों में 1955 के नागरिकता अधिनियम के तहत बसाया गया था.
मतुआ लोगों को हालांकि 2019 के संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता का वादा किया गया है.

अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें इस बात की जानकारी है कि गुजरात में 1955 के कानून के तहत नागरिकता दी जा रही है. हम चाहते हैं कि सीएए 2019 को यथाशीघ्र लागू किया जाए.’’ विवादास्पद सीएए पड़ोसी दक्षेस देशों से धार्मिक उत्पीड़न के चलते पलायन करने वाले सभी हिंदुओं, जैनियों, सिखों और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान कर सकता है, हालांकि, इसके खिलाफ विशेष रूप से पूर्वोत्तर में व्यापक विरोध के मद्देनजर इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.

मुतआ नेताओं के अनुसार, समुदाय के सदस्य कानून के भविष्य को लेकर आशंकित हैं, जिसका क्रियान्वयन लगभग तीन वर्षों से लंबित है. मतुआ बहुल रानाघाट दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि केंद्र की भाजपा सरकार अपना वादा पूरा करेगी.

मतुआ महासंघ के एक अन्य वरिष्ठ नेता असीम सरकार ने हालांकि कहा कि अगर सीएए 2024 से पहले लागू नहीं होता है तो समुदाय के सदस्यों का भाजपा पर वैसा विश्वास नहीं रहेगा जैसा उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान था. सरकार भी हरिनघाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं. उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमारा मानना है कि भाजपा नेता 2019 के अपने वादे को पूरा करेंगे. लेकिन अगर 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यह नहीं होता है तो मतुआ भाजपा पर भरोसा करना बंद कर देंगे.’’ बंगाल में मतुआ समुदाय के करीब 30 लाख लोग रहते हैं और समुदाय की पांच लोकसभा सीटों और नादिया, उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिलों की करीब 40 विधानसभा सीटों पर पकड़ है.

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