
नयी दिल्ली. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को नये संसद भवन में उच्च सदन की पहली बैठक को ‘संकल्प का दिन’ करार देते हुए सदस्यों का आ”ान किया कि जो कुछ भी अच्छा हो उसे लेकर आगे बढ़ना चाहिए और जो गलत बातें हैं, उन्हें पीछे छोड़ दिया जाना चाहिए.
उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति धनखड़ ने सभी सदस्यों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने नये संसद भवन की ओर संकेत करते हुए कहा, ”अमृतकाल में यह बदलाव भारत के भविष्य और विकास के लिए सार्थक साबित होगा.” सभापति ने जैन समाज द्वारा आज के दिन मनाये जाने वाले संवत्सरी पर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सभी से ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ कहा.
उन्होंने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा, ”मैंने अपनी वाणी, कर्म से जाने-अनजाने या किसी भी तरीके से किसी की भावना को आघात पहुंचाया है, दुख पहुंचाया है (तो) मैं आप सभी का क्षमाप्रार्थी हूं.”
उन्होंने कहा, ”आपका हृदय विशाल है. आप मेरी यह क्षमा स्वीकार करेंगे. आगे का रास्ता हम सब के लिए मिलकर सकारात्मक होगा. आज का दिन हमारे लिए संकल्प का दिन है. ” उन्होंने सदस्यों से यह भी अपील कि उन्हें जो भी सर्वोत्तम हो उस सभी को आगे बढ़ना चाहिए और गलत चीजों को पीछे छोड़ देना चाहिए.
सभापति ने कहा कि भारत की प्रगति सबके लिए एक मिसाल है और ‘हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हम इस प्रगति को और गति देने में और महत्वपूण योगदान दें.” उन्होंने सभी सदस्यों से यह विशेष आग्रह किया कि देश और देशहित को सर्वोपरि रखें. उन्होंने कहा, ”हमें भारतीय होने पर गौरव हो, हम भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान करेंगे. मैं पूर्ण रूप से आश्वस्त हूं कि आज की नयी शुरुआत भारत के भविष्य के लिए दूरगामी और सकारात्मक साबित होगी.



