न्यूजक्लिक मामला: अदालत ने प्राथमिकी की प्रति के लिए पुरकायस्थ की अर्जी पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया

नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने ‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और समाचार पोर्टल के एचआर (मानव संसाधन विभाग) प्रमुख अमित चक्रवर्ती की उस याचिका पर बुधवार को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया जिसमें दोनों ने अपनी गिरफ्तारी के बाद प्राथमिकी की प्रति का अनुरोध किया है.

पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ पर चीन के समर्थन में प्रचार करने के लिए धन लेने के आरोप के बाद आतंकवाद रोधी कानून ‘गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम’ (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने पुलिस को कल तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जब अदालत आवेदन पर दलीलें सुनेगी.

इस बीच, अदालत पुलिस द्वारा दायर हिरासत अर्जी की एक प्रति आरोपी के वकील अर्शदीप सिंह खुराना को सौंपने पर सहमत हो गई.
खुराना ने अदालत से प्राथमिकी की प्रति का अनुरोध किया ताकि वह आरोपियों को उपलब्ध कानूनी उपायों के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख कर सकें.

अदालत ने वकील को हिरासत अवधि के दौरान प्रतिदिन एक घंटे आरोपी से मिलने की अनुमति भी दी. न्यायाधीश ने मामले की सुनवायी तब कल के लिए स्थगित कर दी, जब दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसके विशेष लोक अभियोजक मामले पर बहस करने के लिए उपस्थित नहीं हैं. अधिकारियों ने कहा कि पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को न्यायाधीश के आवास पर पेश किए जाने के बाद सात दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

पुलिस ने मंगलवार को 30 से अधिक स्थानों पर छापे मारे थे, मामले के संबंध में कई पत्रकारों से पूछताछ की थी और पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने मंगलवार को दिल्ली में न्यूजक्लिक के कार्यालय को सील कर दिया था. अधिकारियों ने कहा कि 46 “संदिग्धों” से पूछताछ की गई और लैपटॉप और मोबाइल फोन सहित डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जांच के लिए ले जाये गए.

जिन व्यक्तियों से पूछताछ की गई है उनमें पत्रकार उर्मिलेश, औनिंद्यो चक्रवर्ती, अभिसार शर्मा, परंजय गुहा ठाकुरता के साथ ही इतिहासकार सोहेल हाशमी, व्यंग्यकार संजय राजौरा और सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट के डी रघुनंदन शामिल हैं. छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया.

दिल्ली पुलिस ने हमें प्राथमिकी की प्रति नहीं दी, ना ही अपराधों के बारे में बताया : ‘न्यूजक्लिक’

समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ ने अपने परिसरों पर दिल्ली पुलिस की छापेमारी के एक दिन बाद बुधवार को एक बयान जारी कर दावा किया कि उसे प्राथमिकी की प्रति नहीं दी गई और उससे जुड़े लोगों पर जिन अपराधों का आरोप लगाया गया है, उसके बारे में भी जानकारी नहीं दी गई है.

‘न्यूजक्लिक’ ने एक बयान में कहा, ”कल, दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा ‘न्यूजक्लिक’ के कार्यालयों, पत्रकारों और कर्मचारियों के आवासों सहित विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई. हमें प्राथमिकी की प्रति प्रदान नहीं की गई है या उन अपराधों के सटीक विवरण के बारे में सूचित नहीं किया गया है, जिनका आरोप लगाया गया है.” ऑनलाइन समाचार पोर्टल ने दावा किया कि पुलिस ने उसके परिसरों और कर्मचारियों के घरों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिना किसी उचित प्रक्रिया जैसे कि जब्ती मेमो, जब्त किए गए डेटा की मात्रा की जानकारी दिए बिना जब्त कर लिया.

बयान में दावा किया गया, ”हमें अपनी रिपोर्टिंग जारी रखने से रोकने के प्रयास में ‘न्यूजक्लिक’ के कार्यालय को भी सील कर दिया गया है.” इसमें कहा गया, ”हम सरकार की उन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हैं जो पत्रकारिता की स्वतंत्रता का सम्मान करने से इनकार करती हैं और आलोचना को देशद्रोह या राष्ट्र-विरोधी दुष्प्रचार मानती है.” पोर्टल ने दावा किया कि उसे 2021 से विभिन्न केंद्रीय सरकारी एजेंसियों द्वारा निशाना बनाया गया है और उसके कार्यालयों और कर्मचारियों के घरों पर प्रवर्तन निदेशालय, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और आयकर विभाग द्वारा छापे मारे गए हैं.

‘न्यूजक्लिक’ ने बयान में कहा, ”हम जो पता लगाने में सक्षम हुए हैं, वह यह है कि ‘न्यूजक्लिक’ पर अपनी वेबसाइट पर कथित तौर पर चीनी दुष्प्रचार को जगह देने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है. सभी उपकरण, लैपटॉप, गैजेट, फोन आदि को अतीत में जब्त किया जा चुका है. सभी ईमेल और संचार को बारीकी से खंगाला गया है.” ‘न्यूजक्लिक’ ने यह भी दावा किया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने इसके पिछले कई वर्षों के बैंक विवरण, बिल, खर्च और धन के स्रोतों की जांच की है.

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