हमारी प्रतिबद्धता कानून के शासन के प्रति है: पन्नू को लेकर अमेरिका के आरोपों पर बोले मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 20 Dec 2023 07:02 PM
हमारी प्रतिबद्धता कानून के शासन के प्रति है: पन्नू को लेकर अमेरिका के आरोपों पर बोले मोदी
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक सिख अलगाववादी को निशाना बनाने की नाकाम साजिश का संबंध भारत से होने को लेकर अमेरिका के आरोपों पर अपनी पहली टिप्पणी में कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की प्रतिबद्धता कानून के शासन के प्रति है और अगर कोई सूचना देता है तो वह इस पर गौर करेगा.

ब्रिटिश अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक साक्षात्कार में मोदी ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय मजबूत समर्थन है और कुछ घटनाओं को राजनयिक संबंधों से जोड़ा जाना उचित नहीं है. मोदी ने कहा, ”अगर कोई हमें कोई सूचना देता है तो हम निश्चित तौर पर उस पर गौर करेंगे.” उन्होंने कहा, ”अगर हमारे किसी नागरिक ने कुछ भी अच्छा या बुरा किया है, तो हम उस पर गौर करने के लिए तैयार हैं. हमारी प्रतिबद्धता कानून के शासन के प्रति है.”

अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने आरोप लगाया है कि निखिल गुप्ता नाम का व्यक्ति सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश में भारत सरकार के एक कर्मचारी के साथ काम कर रहा था. पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है. भारत ने आरोपों की जांच के लिए पहले ही एक जांच समिति का गठन कर दिया है. साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि भारत ‘विदेशों में स्थित कुछ चरमपंथी समूहों की गतिविधियों को लेकर बहुत चिंतित’ है.

उन्होंने कहा, ”ये तत्व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में डराने-धमकाने और हिंसा भड़काने में लगे हुए हैं.” साथ ही मोदी ने कहा, ”इस संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए मजबूत द्विपक्षीय समर्थन है, जो एक परिपक्व और स्थिर साझेदारी का स्पष्ट संकेतक है.” मोदी ने कहा, ”सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग हमारी साझेदारी का एक प्रमुख घटक रहा है.” उन्होंने कहा, ”मुझे नहीं लगता कि कुछ घटनाओं को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों से जोड़ा जाना उचित है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हो रहे हैं.

उन्होंने कहा, ”हमें इस तथ्य को स्वीकार करने की जरूरत है कि हम बहुपक्षवाद के युग में रह रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”दुनिया आपस में जुड़ी हुई है और एक-दूसरे पर निर्भर भी है. यह वास्तविकता हमें यह मानने के लिए मजबूर करती है कि सभी मामलों पर पूर्ण समझौता सहयोग के लिए एक शर्त नहीं हो सकता.” दोनों पक्ष अब ‘इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इर्मिजंग टेक्नोलॉजीज (आईसीईटी)’ के तहत सेमीकंडक्टर्स, अगली पीढ़ी के दूरसंचार, कृत्रिम मेधा और रक्षा सहित सात विशिष्ट उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग के लिए एक महत्वाकांक्षी खाके पर काम कर रहे हैं.

मोदी ने जून में वाशिंगटन का दौरा किया था जिससे दोनों पक्षों के बीच संबंधों में नई गति आई. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सितंबर में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था . इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने के लिए मोदी के साथ व्यापक बातचीत की थी.

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