ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये, डीजल पर शून्य

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर सरकार ने तेल कंपनियों को राहत दी, कीमतें स्थिर रखने का प्रयास

ऊर्जा संकट के बीच सरकार का कदम: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण बने ऊर्जा संकट के बीच, भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च को अधिसूचना जारी कर, पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत, अब पेट्रोल पर पहले से 13 रुपये प्रति लीटर लगने वाला उत्पाद शुल्क घटाकर सिर्फ 3 रुपये कर दिया गया है, और डीजल पर पहले 10 रुपये का शुल्क शून्य कर दिया गया है।

क्यों लिया गया यह निर्णय?
यह कदम वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी और ऊर्जा संकट के कारण तेल विपणन कंपनियों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50% बढ़ चुकी हैं, जिससे कंपनियों का घाटा बढ़ रहा था। इस राहत से तेल कंपनियों का वित्तीय बोझ कम होगा और उपभोक्ताओं को भी सस्ता ईंधन मिल सकेगा।

प्रभाव और मौजूदा स्थिति
सरकार का यह कदम तुरंत प्रभावी हो गया है। सरकारी तेल कंपनियों जैसे एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी को इस राहत का लाभ मिलेगा, जिससे उनके घाटे में कमी आएगी। वर्तमान में, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि कुछ निजी कंपनियों ने अपने रिटेल रेट में बढ़ोतरी की है।

वैश्विक और घरेलू आर्थिक स्थिति
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अवरुद्ध हुआ है, जो भारत की कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 88% आयात करता है। इससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल आया है। भारत सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए उत्पाद शुल्क में कटौती का फैसला किया है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

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