केंद्रीय एजेंसी ईडी ने आज रायपुर की एक स्पेशल कोर्ट में अपनी पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दायर की। यह मामला राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान CGPSC परीक्षा घोटाले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। एजेंसी ने स्पेशल PMLA कोर्ट में 3 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघारिया के नाम शामिल हैं।
ED का दावा है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के गिरफ्तार पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने 2021 की राज्य सेवा परीक्षा में एक बिजनेसमैन के बेटे और बहू को फ़ायदा पहुँचाने के बदले, अपने कंट्रोल वाली एक एनजीओ संस्था के ज़रिए सीएसआर मद के लिए ₹45 लाख लिए थे। इस मामले में अब तक पीएससी में हुए भ्रष्टाचार से हुई कुल कमाई का आंकड़ा ₹3.28 करोड़ पहुंचा है।
जानते चलें कि 2020 से 2023 तक CGPSC के प्रमुख रहे टामन सिंह सोनवानी को ED ने जुलाई में गिरफ़्तार किया था। यह गिरफ़्तारी कथित भ्रष्टाचार, प्रश्न-पत्र लीक और 2020-21 में आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हेरफेर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी। ED अब तक चुकी 3700 पेज की चार्जशीट प्रस्तुत कर चुकी है।
आरोप पत्र में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, रिश्तेदारों को चयन में लाभ पहुंचाने, अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये लेने और रकम के लेनदेन के आरोपों का पूरा ब्योरा दिया गया है। एजेंसी की ओर से कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों में वित्तीय लेन-देन और दूसरे सबूतों से जुड़ी जानकारी शामिल बताई गई है। ED ने चार्जशीट में तीनों आरोपियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया है। अब इस मामले में कोर्ट आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा। आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
CGPSC केस (CGPSC Case) छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और इंटरव्यू की प्रक्रिया में कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़े उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया गया। मामले में डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत दूसरे पदों पर चयन को लेकर भी सवाल उठे थे। शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े कई पहलुओं की जांच एजेंसियों ने की।
ED की जांच 2020 और 2021 में भर्ती के लिए आयोजित CGPSC परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्न पत्र लीक और हेरफेर से जुड़ी है.
दूसरी ओर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन पीएससी चेयरमैन सोनवानी से 60-65 लाख रुपए में एक पद की डील हुई जिसमें पेपर से इंटरव्यू तक चयन की दी गई थी फुल गारंटी. रायपुर में मिला पीएससी एक्यजाम का पेपर, इसी के लिए ली गई मोटी रकम. प्रति पोस्ट 60-65 लाख में सौदा हुआ तथा कुल 3 करोड़ के लेन-देन के सबूत मिले हैं। एजेंसी ने कहा कि उन्हें मिले पैसे को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग के तौर पर दिखाया गया था। साथ ही, यह भी बताया गया कि इस मामले में अब तक अपराध से हुई कुल कमाई का आंकड़ा ₹3.28 करोड़ आंका गया है।