भारत प्रदत्त राहत सामग्रियां भेजी जा रही हैं नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 06 Nov 2023 06:52 PM
भारत प्रदत्त राहत सामग्रियां भेजी जा रही हैं नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में
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काठमांडू. भारत द्वारा प्रदत्त आपात राहत सामग्रियों से भरे दो ट्रकों को सोमवार को नेपाल के उत्तर-पश्चिमी पर्वतीय क्षेत्र में सुरक्षार्किमयों की एक टीम के साथ भेजा गया जहां शुक्रवार को भूकंप आने के बाद बेघर हुए लोग भोजन, कपड़े और दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं.

नेपाल में तीन नवंबर को आधी रात से थोड़ी देर पहले 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था जिसकी वजह से 157 लोगों की जान चली गयी थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गये थे. अधिकारियों ने बताया कि नेपाल के जाजरकोट और रुकुम जिले भूकंप के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुए जहां करीब 8000 मकान क्षतिग्रस्त हो गये . उनमें सरकारी एवं निजी दोनों ही तरह के मकान हैं.

बांके के मुख्य जिला अधिकारी श्रवण कुमार पोखारेल ने बताया कि सशस्त्र पुलिस बल नेपाल के र्किमयों के संरक्षण में नेपालगंज हवाई अड्डे से राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गयी है. उन्होंने बताया कि एक ट्रक राहत सामग्री जाजरकोट के लिए और एक ट्रक राहत सामग्री रुकुम पश्चिम के लिए है. उन्होंने कहा कि राहत सामग्रियां संबंधित जिलों के मुख्य जिला अधिकारियों को सौंपी जाएंगी.

भारतीय वायुसेना की विशेष सी-130 उड़ान 10 करोड़ रुपये की आपात राहत सामग्री की पहली खेप लेकर रविवार को नेपाल पहुंची. अधिकारियों के अनुसार राहत सामग्रियों में प्लास्टिक के 625 तिरपाल, 1000 ‘स्लीपिंग बैग’, 1000 कंबल, बड़े आकार के 70 तंबू, टेंट से संबंधित चीजों के 35 पैकेट और 48 अन्य चीजें हैं.

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री पूर्ण बहादुर खडका को यह राहत सामग्री सौंपी. भूकंप के पीड़ितों ने अपने मृत रिश्तेदारों का रविवार को अंतिम संस्कार किया. विषम भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण राहत सामग्री कई क्षेत्रों में अब तक पहुंच नहीं पायी है.

चिउरीटोल के निवासी सुरेश बीके के अनुसार, भूकंप के कारण गांव में 13 लोगों ने अपनी जान गंवाई है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.
सुरेश ने कहा कि गांव में कम से कम 56 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं जबकि 110 मकानों की हालत ऐसी हो गई है कि वहां रहा नहीं जा सकता. ग्रामीण मदद पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं.

काठमांडू पोस्ट अखबार के अनुसार सुरेश ने कहा, ”हमें अब तक कोई मदद नहीं मिली है. हमारी सारी फसलें, अनाज, खाने-पीने की चीजें, कपड़े एवं अन्य कीमती चीजें मलबे में दब गए. हम उन्हें निकालने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि हमारी मदद के लिए कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है.” उन्होंने कहा, ”बाहर असहनीय ठंड है और शुक्रवार रात से हममें से कोई सोया नहीं है.” भेरी नगरपालिका के महापौर चंद्र प्रकाश घरती ने कहा कि स्थानीय इकाई राहत वितरण के लिए आंकड़े जुटा रही है, जिसके कारण प्रभावित गांवों को तत्काल राहत सामग्री भेजने में देरी हो रही है.

भूकंप पीड़ितों को तुरंत मदद की आवश्यकता है और उन्होंने सरकार पर आपात स्थितियों के दौरान भी मदद पहुंचाने में देरी का आरोप लगाया है. चिउरीटोल निवासी कलावती सिंह ने कहा कि ठंड में दो रातें गुजारने के बाद गांववाले बीमार पड़ने लगे हैं. सिंह ने कहा, ” बुजुर्ग और बच्चे बीमार पड़ रहे है. हमारे पास गर्म कपड़े नहीं हैं और हम खुले में रात-दिन बिता रहे हैं.

उन्होंने कहा, ” कोई डॉक्टर या चिकित्सकीय मदद नहीं है. हमारे पास अधिकतम दो दिनों के लिए खाने-पीने की चीजें हैं. हमें और मदद शीघ्र पहुंचने की आशा है. ” माईिरपब्लिका अखबार के अनुसार उपप्रधानमंत्री ने रविवार को कहा था कि सरकार ने भूकंप प्रभावितों के उपचार, राहत एवं पुनर्वास को प्राथमिकता में रखा है. उन्होंने कहा कि सरकार पूरी राजकीय मशीनरी को लगाकर भूकंप के कारण घायल हुए लोगों को एक ही दिन में बाहर निकालकर अस्पतालों में भर्ती कराने में सफल रहे. उन्होंने कहा कि भूकंप प्रभावितों के बीच राहत सामग्री का वितरण रविवार को ही शुरू हो गया.

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