
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट: शुक्रवार को भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर को छू लिया है। शुरुआती कारोबार में यह 28 पैसे टूटकर 94.24 के स्तर पर पहुंच गया है। यह तीसरे लगातार सत्र में गिरावट का संकेत है, जिसमें बुधवार और मंगलवार को भी रुपये में तेज गिरावट देखी गई है। इस गिरावट से भारतीय मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
गिरावट के पीछे मुख्य कारण
रुपये की यह निरंतर गिरावट कई महत्वपूर्ण कारणों से हो रही है। सबसे प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों का भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना है। इसके अतिरिक्त, ईरान और मध्य पूर्व में जारी संकट ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इन घटनाओं के चलते विदेशी पूंजी की निकासी और मुद्रा में अस्थिरता बढ़ी है।
बाजार पर प्रभाव और आगे की संभावनाएँ
रुपये की गिरावट ने निवेशकों और व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने जनवरी में हाजिर बाजार से 2.52 अरब अमेरिकी डॉलर खरीदे हैं, जिससे मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, वैश्विक घटनाएँ और क्षेत्रीय तनाव इस गिरावट को जारी रखने का कारण बने हुए हैं। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रहती है, तो रुपये की विनिमय दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है।



