जनगणना का पहला चरण एक अप्रैल 2026 से घरों की गिनती के साथ होगा शुरू

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 29 Jun 2025 08:25 PM
जनगणना का पहला चरण एक अप्रैल 2026 से घरों की गिनती के साथ होगा शुरू
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नयी दिल्ली. आगामी जनगणना के लिए घरों की गिनती का कार्य एक अप्रैल, 2026 से शुरू होगा, जो इस दशकीय प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत होगी. भारत के महापंजीयक ने यह जानकारी दी है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में, भारत के जनगणना आयुक्त और महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि घरों का सूचीकरण अभियान और आवास गणना एक अप्रैल, 2026 से शुरू होगी.

पत्र में कहा गया है कि उससे पहले राज्यों एवं जिला प्रशासन के सहयोग से निरीक्षकों एवं गणकों की नियुक्ति की जाएगी तथा उनके बीच कामों का विभाजन किया जाएगा. जनगणना दो चरणों में होगी . पहले चरण में यानी घरों के सूचीकरण अभियान (एचएलओ) में प्रत्येक घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी.

पत्र के अनुसार, इसके बाद दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पीई) में हर घर में प्रत्येक व्यक्ति का जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किया जाएगा और यह चरण एक फरवरी, 2027 से शुरू होगा. एक सरकारी बयान में कहा गया था कि जनगणना में जातियों की भी गिनती की जाएगी. जनगणना कार्य के लिए 34 लाख से अधिक गणक और पर्यवेक्षक तथा लगभग 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे. यह अब तक की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना है. आगामी जनगणना ‘मोबाइल एप्लीकेशन’ की मदद से डिजिटल माध्यम से की जाएगी. लोगों को स्व-गणना का प्रावधान भी उपलब्ध कराया जाएगा.

महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने नागरिकों से पूछे जाने वाले लगभग तीन दर्जन प्रश्न तैयार किए हैं. सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न घरों में फोन, इंटरनेट, वाहन (साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, जीप, वैन) और उपकरणों (रेडियो, टीवी, ट्रांजिस्टर) आदि के स्वामित्व के बारे में पूछा जाएगा.

लोगों से अनाज उपभोग, पेयजल और प्रकाश के स्रोत, शौचालयों के प्रकार और सुलभता, अपशिष्ट जल निपटान, स्नान और रसोई की सुविधाओं, खाना पकाने के लिए प्रयुक्त ईंधन और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन के बारे में भी पूछा जाएगा. अतिरिक्त/अन्य प्रश्नों में घर के फर्श, दीवारों और छत के लिए प्रयुक्त सामग्री, इसकी स्थिति, घर में रहने वालों की संख्या, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की उपस्थिति और क्या घर की मुखिया महिला है या अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित है, आदि शामिल हैं.

जनगणना के लिये प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में 31 दिसंबर, 2025 के बाद नहीं होगा बदलाव

केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में कोई भी प्रस्तावित परिवर्तन 31 दिसंबर से पहले कर लें, क्योंकि इस दिन तक किए गए बदलाव जनगणना कार्य के लिए अंतिम माने जाएंगे. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा है कि जनगणना के लिए सभी गांवों और कस्बों को एक समान गणना प्रखंडों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक प्रखंड के लिए एक गणक (गणना करने वाला) नियुक्त किया जाता है, ताकि जनसंख्या की गणना के दौरान किसी भी चूक या दोहराव से बचा जा सके.

नियमों के अनुसार, जनगणना प्रशासनिक इकाइयों जैसे जिला, उप-जिला, तहसील, तालुका और थाना की सीमा निर्धारित होने के तीन महीने बाद ही की जा सकती है. नारायण ने कहा कि एक अप्रैल 2026 से घर सूचीकरण कार्य, पर्यवेक्षकों और गणकों की नियुक्ति एवं उनके बीच कार्य विभाजन किया जाएगा तथा एक फरवरी 2027 से जनगणना शुरू होगी. पत्र में कहा गया है कि एक बार गणना प्रखंडों को अंतिम रूप दे दिए जाने के बाद प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए.

मुख्य सचिवों को लिखे अपने पत्र में नारायण ने उनसे सभी विभागों को नगर निगमों, राजस्व गांवों, तहसीलों, उप-विभागों या जिलों की सीमाओं में कोई भी प्रस्तावित बदलाव 31 दिसंबर से पहले कर लेने का निर्देश देने को कहा. उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि एक जनवरी, 2026 और 31 मार्च, 2027 के बीच प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, जिस दौरान जनगणना का कार्य होगा.

मौजूदा सीमाओं में किसी भी तरह के बदलाव की सूचना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनगणना निदेशालयों एवं भारत के महापंजीयक को 31 दिसंबर, 2025 तक देनी होगी. पत्र में कहा गया है, ”जनगणना 2027 के लिए प्रशासनिक इकाइयों की सीमा में 31 दिसंबर, 2025 के बाद कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा.” गणकों के लिए उचित कार्यभार सुनिश्चित करने के लिए, जनगणना के लिए एक प्रशासनिक इकाई को ‘प्रखंड’ नामक प्रबंधनीय खंडों में विभाजित किया जाता है.

प्रखंड जनगणना के प्रयोजनों के लिए एक काल्पनिक मानचित्र पर एक गांव या शहर के भीतर एक स्पष्ट रूप से परिभाषित क्षेत्र है.
इन्हें घरों के सूचीकरण अभियान के दौरान आवास सूचीकरण प्रखंड(एचएलबी) और जनसंख्या गणना के दौरान गणना प्रखंड (ईबी) कहा जाता है तथा ये जनगणना के लिए सबसे छोटी प्रशासनिक इकाइयों के रूप में काम करते हैं.

जातिगत गणना के साथ भारत की 16वीं जनगणना 2027 में की जाएगी, जिसकी संदर्भ तिथि लद्दाख जैसे बर्फीले क्षेत्रों में एक अक्टूबर, 2026 और देश के बाकी हिस्सों में एक मार्च, 2027 होगी. जनगणना दो चरणों में होगी . पहले चरण में यानी घरों के सूचीकरण अभियान (एचएलओ) में प्रत्येक घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी.

उसके बाद, दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पीई) में हर घर में प्रत्येक व्यक्ति का जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किया जाएगा . एक सरकारी बयान में कहा गया था कि जनगणना में जातियों की भी गिनती की जाएगी.
जनगणना कार्य के लिए 34 लाख से अधिक गणकों और पर्यवेक्षक तथा लगभग 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे.
यह अब तक की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी. आगामी जनगणना ‘मोबाइल एप्लीकेशन’ की मदद से डिजिटल माध्यम से की जाएगी. लोगों को स्व-गणना का प्रावधान भी उपलब्ध कराया जाएगा.

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