महिला आरक्षण विधेयक का क्या मतलब अगर इसे तुरंत लागू नहीं कर सकते: प्रियंका गांधी

धार: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिलाओं के साथ ‘मजाक’ कर रही है क्योंकि विधानमंडलों में उनके लिए सीटें आरक्षित करने वाला नया कानून 10 साल तक लागू नहीं किया जा सकता है।

चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के धार जिले के मोहनखेड़ा में बृहस्पतिवार को एक जनसभा में बोलते हुए उन्होंने पूछा कि अगर महिला आरक्षण तुरंत लागू नहीं किया जा सकता तो सरकार इस स्तर पर विधेयक क्यों लायी।
गांधी ने कहा, ‘‘ भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक लेकर आई….हम सभी विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया।

फिर पता चला कि इसे 10 साल तक लागू नहीं किया जाएगा, उससे पहले जनगणना कराई जाएगी और परिसीमन होगा। तो फिर इस घोषणा का मतलब क्या था?…आप महिलाओं को मजाक समझ रहे हैं?’’ कांग्रेस नेता ने बताया कि सरकार को नये अधिनियम (जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करता है) को लागू करने से पहले परिसीमन करना होगा और इसमें 10 साल लगेंगे।

गांधी ने आगे कहा कि अगर सभी को समान अधिकार है तो जाति आधारित जनगणना क्यों नहीं कराई जा रही? उन्होंने कहा कि बिहार में जाति आधारित जनगणना में पाया गया कि 84 फीसदी आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दलित है, लेकिन ये लोग सरकारी पदों पर नहीं हैं, लेकिन इस बारे में जब उनसे पूछा जाता है तो वे (भाजपा) चुप हो जाते हैं।

घोर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं अधिकतर भारतीय परिवार

कांग्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर आधारित एक लेख का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि देश के अधिकतर लोग सरकार द्वारा निर्मित आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि महंगाई की तुलना में लोगों की आमदनी में बढ़ोतरी पिछले 40 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर चली गई है.

उन्होंने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित लेख का उल्लेख करते हुए कहा , ” रिजर्व बैंक के आंकड़ों से सामने आ रहे कुछ ताज.ा और चिंताजनक विश्लेषण. घरेलू बचत दरें अब ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं. पिछले चार वर्षों में मुद्रास्फीति की तुलना में आय वृद्धि पिछले 40 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर है. ”

रमेश ने कहा , ” वित्त वर्ष 23 में शुद्ध घरेलू वित्तीय बचत पांचवें हिस्से तक कम हो गई है. वित्त वर्ष 2023 में गैर – आवासीय कर्ज दोगुना हो गया है , जो संभवत? वित्त उपभोग के लिए लिया गया ऋण है. यह डेटा बताता है कि मोदी सरकार 2022-23 के उपभोग व्यय सर्वेक्षण को क्यों दबा रही है. इससे स्पष्ट रूप से पता चलेगा कि अधिकतर भारतीय किस प्रकार गरीब होते जा रहे हैं. ” उन्होंने दावा किया , ” यह स्पष्ट है कि अधिकतर भारतीय परिवार ‘ मोदी – निर्मित ‘ आर्थिक संकट के उच्चतम स्तर का सामना कर रहे हैं. बढ़ती मुद्रास्फीति , बढ़ता कर्ज , धीमी घरेलू खपत और गिरती बचत. आंकड़ों को दबाकर मोदी जी जवाबदेही से बच नहीं सकते. ”

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