लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद करने के बाद छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा है कि राहुल गांधी के समक्ष हमने झीरम घाटी नक्सली हमला काण्ड के बहुत से अहम तथ्य रखे।
हमने उन्हें बताया कि जिन दस लोगों को दोषी ठहराया गया, वे असल में ग्रामीण थे – ऐसे लोग जो खाना पहुंचाने या गड्ढे खोदने जैसे काम करते थे – जबकि उन बड़े लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिन्हें बस ‘फरार’ घोषित कर दिया गया था।
दूसरी बात यह कि NIA ने साजिश वाले पहलू की बिल्कुल भी जांच नहीं की। उन्होंने पैराग्राफ 307 में लिखा था कि ‘नंदकुमार पटेल और उनके बेटों की पहचान के बारे में पूछताछ की गई थी, लेकिन जांच उस बिंदु से ज़रा भी आगे नहीं बढ़ी।
हमने राहुल गांधी को इस बारे में बताया और कानूनी राय के लिए मदद मांगी। उन्होंने हमें कानूनी मदद के लिए कुछ खास लोगों से सलाह लेने को कहा और संकेत दिया कि अगर हालात की मांग हुई तो पुलिस कस्टडी मांगने जैसे आगे के कदमों पर विचार किया जा सकता है। राहुल गांधी ने सुरक्षा इंतजामों के बारे में भी खास जानकारी मांगी कि सुरक्षा कहां, कब और किस हद तक दी गई थी।
झीरम घाटी कांड पर हाल ही में आए एक न्यायिक फैसले के खिलाफ आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। माओवादी हमले से जुड़े मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज ने कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। विगत शुक्रवार को परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों और सजा पाए आरोपियों के परिजनों की बैठक हुई, जिसमें मामले की जांच, आरोपियों की भूमिका और फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई। समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि आरोपियों के परिजनों ने उनके निर्दोष होने का दावा किया है।
13 साल पहले झीरम घाटी में क्या हुआ था?
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को घेरकर पहले विस्फोट किया और फिर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, बस्तर टाइगर और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता उदय मुद्लियार समेत कांग्रेस के कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। अलग-अलग रिकॉर्ड में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई। NIA से जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड में 27 मौतों और 38 घायलों का उल्लेख है।