
शिमला/मंडी. हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की कई घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गयी और करीब 50 लोग लापता हैं. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि बारिश के कारण कई मकान, पुल और सड़कें बह गयीं. राज्य आपात अभियान केंद्र ने बताया कि कुल्लू में निरमंड, सैंज और मलाना इलाकों, मंडी में पधर और शिमला जिले के रामपुर में बादल फटे. शिमला के पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि शिमला में रामपुर उपमंडल के समेज खुड (नाला) में बादल फटने से दो लोगों की मौत हो गयी तथा 30 अन्य लापता हैं.
शिमला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि दो लोगों को घटनास्थल से बचा लिया गया. सड़कों के बह जाने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया है. एक अधिकारी ने बताया कि भूस्खलन के कारण मनाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है.
घटनास्थल पर मौजूदा शिमला के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल, पुलिस और होम गार्ड ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है और लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि मंडी जिले में पधर उपमंडल के तेरांग के समीप राजबन गांव में बुधवार रात को बादल फटने की एक अन्य घटना में दो लोगों की मौत हो गयी तथा आठ अन्य लोग लापता हो गए. दो मकान भी बह गए जबकि एक अन्य मकान क्षतिग्रस्त हो गया.
अधिकारियों के मुताबिक, चंडी देवी (75) और चैत्री देवी (90) के शव बरामद किये गए हैं तथा एक घायल व्यक्ति (25 वर्षीय राम सिंह) को बचा लिया गया. घायल की हालत गंभीर है. कुल्लू जिले में बादल फटने की एक अन्य घटना में सात लोग लापता हो गए. कुल्लू की उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”कुल्लू जिले के निरमंड मंडल के भागीपुल इलाके में सात लोग लापता हैं और करीब आठ-नौ मकान बह गए हैं. सीआईएसएफ और विशेष होम गार्ड को लापता लोगों की तलाश के लिए खोज अभियान में लगाया गया है.” उन्होंने बताया कि शिमला जिले की सीमा पर समेज में तीन लोग लापता हैं तथा तीन-चार मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं. मलाना बांध भी टूटने की खबर है लेकिन स्थिति अभी नियंत्रण में है.
उन्होंने बताया कि कुछ लोग मलाना-1 जल विद्युत परियोजना में फंसे हुए हैं. वे भूमिगत इमारतों में हैं और सुरक्षित हैं तथा एनडीआरएफ और होम गार्ड के दल उन्हें बाहर निकालने के प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मनाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन तथा ब्यास नदी का पानी घुसने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है. तोरुल ने बताया कि जिले में सभी शैक्षणिक संस्थानों तथा विद्यालयों को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात की और राज्य में बादल फटने से उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया. शाह ने इस स्थिति में मुख्यमंत्री को केंद्र की ओर से हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया. इस मामले पर आपात बैठक करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा कि बुधवार रात से शिमला, कुल्लू और मंडी जिलों में व्यापक नुकसान पहुंचा है और करीब 50 लोग लापता हैं तथा मनाली का सड़क संपर्क टूट गया है.
सुक्खू ने कहा कि आपदा निगरानी के लिए राज्य में 13 स्थानों पर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं और जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने तथा बेली ब्रिज बनाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन गतिविधियों को संचालित करने के लिए पुलिस को पांच परिवहन ड्रोन उपलब्ध करवाए जाएंगे तथा बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को 50 जनरेटर दिए जाएंगे. उन्होंने लोगों से एहतियाती कदम उठाने और नदियों के पास नहीं जाने का आग्रह किया.
सुक्खू ने बताया कि शाह और केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है. उन्होंने बताया कि सेना तथा वायु सेना से मदद मांगी जाएगी और राज्य में आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ के दो और दल भेजे जाएंगे. नड्डा ने मुख्यमंत्री से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और मोदी सरकार की ओर से हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया है.
नड्डा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”हिमाचल प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर बादल फटने के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान की दुखद खबरें प्राप्त हुई हैं, मुख्यमंत्री से राज्य में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में विस्तृत बातचीत की है और मोदी सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है.” उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों तक पहुंचने और उन्हें राहत मुहैया कराने की भी अपील की है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की घटना से हुए जानमाल के नुकसान पर दुख जताया और लापता लोगों का जल्द पता लगाए जाने की कामना की. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि राज्य में भारी बारिश और बादल फटने के कारण व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बाधित हुआ है. वाहनों के गुजरने के लिए बनाए चार पुल और पैदल पार पुल बह गए हैं, बचाव अभियान संचालित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि सेब की फसल भी बर्बाद हो गयी है.
भूस्खलन के कारण शिमला-जुन्गा मार्ग बंद कर दिया गया है और चंबा के चुराह विधानसभा क्षेत्र के राजनगर में मलबे में वाहनों के दबने की खबरें आ रही हैं और हमीरपुर जिले में भी सड़कें अवरुद्ध हैं. वहीं मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश, गरज के साथ छींटे और बिजली गिरने को लेकर ‘रेड अलर्ट’ जारी किया.
विभाग ने भूस्खलन, जमीन धंसने के अलावा पानी व बिजली की आपूर्ति प्रभावित होने, फलों और खड़ी फसलों को नुकसान, तेज हवा के साथ-साथ निचले इलाकों में जलभराव के कारण कमजोर संरचनाओं और ‘कच्चे’ मकानों को खतरा होने की भी चेतावनी जारी की.
हिमाचल प्रदेश में कई हिस्सों में बुधवार शाम से ही भारी बारिश हो रही है. राज्य में पालमपुर में सबसे अधिक 212 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी. इसके बाद चौरी में 203 मिमी, धर्मशाला में 183.2 मिमी, जोगिंदरनगर में 161 मिमी, कांगड़ा में 150 मिमी, सुजानपुर टीरा में 142 मिमी, बैजनाथ में 135 मिमी, पोंटा साहिब में 121.2 मिमी, नाहन में 98.9 मिमी, कुफरी में 84.5 मिमी, शिमला में 64.6 मिमी, सैंज में 61 मिमी, बिलासपुर में 56 मिमी और बरठी में 50 मिमी बारिश दर्ज की गयी.
मौसम विज्ञान विशेषज्ञ संदीप शर्मा ने बताया कि राज्य में 20 स्टेशन पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गयी है. उन्होंने बताया कि कांगड़ा, चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में बृहस्पतिवार को भारी बारिश का ‘ओरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है. राज्य में अगले चार-पांच दिन बारिश जारी रहने का अनुमान है. हिमाचल प्रदेश के आपात अभियान केंद्र के अनुसार, मंगलवार तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 27 जून को मानसून के पहुंचने के बाद से बारिश से जुड़ी घटनाओं में 65 लोग मारे जा चुके है. प्रदेश को 433 करोड़ रुपये का नुकसान भी पहुंचा है.



