मुझे कुछ हुआ तो उसके लिए सेना प्रमुख, आईएसआई महानिदेशक जिम्मेदार होंगे: इमरान

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 27 Aug 2024 08:24 PM
मुझे कुछ हुआ तो उसके लिए सेना प्रमुख, आईएसआई महानिदेशक जिम्मेदार होंगे: इमरान
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इस्लामाबाद. जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को दोहराया कि उनकी हालत के लिए सेना और आईएसआई जिम्मेदार हैं और साथ ही उन्होंने अपनी जान को खतरे का अंदेशा भी जताया. पिछले साल से अदियाला जेल में बंद खान (71) ने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया कि उसे देशभर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पाकिस्तान क्रिकेट को बर्बाद करने को लेकर आलोचना बर्दाश्त नहीं है. खान ने जेल से सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किये गए एक पोस्ट में चुनावों में धांधली के बारे में दावा दोहराया और कहा कि केवल एक वास्तविक जनादेश वाली सरकार ही मौलिक सुधारों की योजना बनाने में सक्षम होगी.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के संस्थापक खान ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आईएसआई मेरे कारावास से संबंधित सभी प्रशासनिक मामलों को नियंत्रित करती है. मैं इसे फिर से कह रहा हूं: अगर मेरे साथ कुछ भी होता है, तो सेना प्रमुख और डीजी (महानिदेशक) आईएसआई जिम्मेदार होंगे.” खान की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब पाकिस्तान सरकार ने दो दिन पहले यह कहा था कि पिछले साल नौ मई को हुई हिंसा से संबंधित मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री खान के खिलाफ मुकदमा सैन्य अदालत में चलाया जा सकता है.

कानूनी मामलों के सरकारी प्रवक्ता बैरिस्टर अकील मलिक ने कहा था, “पिछले साल नौ मई को हुई घटनाओं और तोड़फोड़ के कारण सेना अधिनियम लागू हुआ, क्योंकि सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया गया और उन्हें नुकसान पहुंचाया गया.” पिछले वर्ष नौ मई को, इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर से खान की कथित भ्रष्टाचार के मामले में अर्धसैनिक रेंजर्स द्वारा गिरफ्तारी के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे.

खान ने ‘एक्स’ पर किये पोस्ट की शुरुआत उन पर हुए दो हमलों के उल्लेख से की: पहला पंजाब प्रांत के वजीराबाद में और फिर इस्लामाबाद के न्यायिक परिसर में. उन्होंने दावा किया कि आईएसआई ने वजीराबाद से सीसीटीवी फुटेज चुरा ली थी और इस्लामाबाद में हमले से एक रात पहले आईएसआई ने उस क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया था, जहां हमला हुआ था. खान ने कहा कि उन्होंने पहले ही बता दिया है कि इस्लामाबाद रैली क्यों स्थगित की गई.

बांग्लादेश में सामने आए हालात के साथ तुलना करते हुए उन्होंने एक संक्षिप्त टिप्पणी भी की: “मवेशियों को मनचाही दिशा में ले जाया जा सकता है, इंसानों को नहीं” और कहा, “सेना प्रमुख, प्रधान न्यायाधीश और पुलिस प्रमुख सभी प्रधानमंत्री के प्रति वफादार थे (बांग्लादेश में), लेकिन जब लोग सड़कों पर उतरे, तो मामला पलट गया.” उन्होंने कहा, “शासन की आलोचना करने वाले किसी भी व्यक्ति को डिजिटल आतंकवादी करार दिया जाता है. जब इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, तो लोगों ने विरोध किया, लेकिन सत्ता में बैठे लोग आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर सके. किसी को भी अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने की अनुमति नहीं है. देश इसके लिए एक विशिष्ट संस्था को दोषी ठहराता है.”

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